तेरी करुणा की घनी छाँव में,जी लगता है,सांवरे अब तो तेरे,गाँव में जी लगता है,अश्क रुकते नहीं,आँखों में मेरी रोके से,इनका तो बस,तेरे पांवों में जी लगता है। हाथ कस के पकड़ ले,मेरा सांवरे,मैं छुड़ाना भी चाहूँ,छुड़ा ना सकूँ,मेरी हार साँस पे,श्याम लिख इस तरह,मैं मिटाना भी चाहूँ,मिटाना ना सकूँ,हाथ कस के पकड़ ले,मेरा सांवरे,मैं छुड़ाना भी चाहूँ,छुड़ा ना सकूँ।। …
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