गजब की बांसुरी बजती है वृन्दावन बसैया की, करूँ तारीफ़ मुरली की या मुरली धर कन्हैया की । जहां न काम चलता तीर और कमानो से, विजय नटवर की होती है वहां मुरली की तानो से ॥ श्याम बांसुरी बजाये री अधर धर के, रूप माधुरी पिलाए यह तो भर भर के । बांसुरी बज के छीने मन का आराम …
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