घुटुरन अंगना फिरत कन्हैया,मधुरी बोल कछु सीखत मोहन,कहन लागे अब मैया मैया,घुटुरन अंगना फिरत——- नन्द मेहर सों बाबा बाबा,बलदाऊ सों भैया भैया,घुटुरन अंगना फिरत——– अधर बीच दंतुल मन मोहत,नन्द यशोदा लेत बलैया,घुटुरन अंगना फिरत——– ग्वालबाल सजि धजि संग गोपिन,धूम मचावत देत बधैया,घुटुरन अंगना फिरत,,,,,,,,, कान्हा बस इतना बता दे क्यों मुझको तरसाए,कर्मा ध्रुव तूने नरसी तारेभगत अजामिल पार उतारे तेरे …
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