दो खरगोश अपने माँ के साथ एक सूंदर से गांव के हरे भरे मैदान में रहते थे। उन दो खरगोश के नाम थे चिंटू और मिंटू। चिंटू बहुत ही नटखट था, और पिंटू बिलकुल उसके अपोजिट बहुत ही शांति पूर्वे था। वे अपनी माँ के साथ एक पेड़ की जड़ के नीचे रहते थे। ” सुन मेरे बच्चों, तुम खेलने …
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शेर का तीसरा पुत्र!!
एक जंगल में एक शेर अपनी शेरनी के साथ रहता था। दोनों में बहुत ही बड़ा प्रेम था। दोनों शिकार के लिए साथ-साथ जाते और शिकार मारकर साथ ही खाया करते थे। कुछ दिनों बाद शेरनी ने दो बच्चों को जन्म दे दिया। शेर ने कहा, “अब तुम शिकार के लिए मत चला करो। घर पर ही रहकर बच्चों की …
Read More »घमंडी बाघ!!
एक समय की बात है, एक जंगल में एक बाघ रहता था। एक दिन, बाघ अपनी गुफा से बाहर निकल आया और शिकार की तलाश में चला गया। थोड़ा देर चलने के बाद बाघ ने एक हिरन की शिकार की। जैसे-जैसे बाघ अपने भोजन का आनंद ले रहा था, एक छोटी हड्डी उसके जबड़े में फंस गई। उसने अपने पंजे …
Read More »वाचाल गधा और धोबी – पंचतंत्र की कहानी!!
एक शहर में शुद्धपट नाम का एक धोबी रहता था। उसके पास एक गधा भी था। गधे को पर्याप्त भोजन ना मिलने के कारण वह बहुत ही दुबला पतला और कमजोर हो गया था जिसके चलते वह ढंग से काम भी नहीं कर पा रहा था। धोबी को चिंता होने लगी, उसके मन में विचार आया कि कुछ दिन पहले …
Read More »हमेशा सोच समझ कर काम करो – पंचतंत्र की कहानी !!
दक्षिण भारत के एक प्रसिद्ध नगर पाटलिपुत्र में मणिभद्र नाम का एक धनिक महाजन रहता था। लोक सेवा और धार्मिक कार्यों में निहित रहने के कारण मणिभद्र के पास धन संचय में कमी हो गई। इस बात को लेकर मणिभद्र काफी चिंतित रहता था। उसकी यह चिंता निरर्थक नहीं थी। धन विहीन मनुष्य के गुण भी दरिद्रता के तले दब …
Read More »कुत्ता जो विदेश चला गया – पंचतंत्र की कहानी!!
प्राचीन समय में एक गांव में चित्रांग नाम का एक कुत्ता रहता था। एक बार उस गांव में अकाल पड़ गया। अकाल पड़ने के कारण अन्न की बहुत ज्यादा कमी हो गई, जिसके कारण कई कुत्तों के वंश का नाश हो गया। चित्रांग भी इस समस्या के कारण बहुत ही चिंतित रहता था।h जिसके घर में घुसकर चित्रांग ने खाना …
Read More »राधा का चरणामृत
आज हम बालकृष्ण और राधा का एक प्रसंग सुनेंगे । एक बार गोकुल में बालकृष्ण बीमार हो गए थे । कोई भी वैद्य, औषधि, जडी-बूटी उन्हें ठीक नहीं कर पा रही थी । गोपियों को यह बात पता चली । गोपियां कृष्ण से मिलने आई । कृष्ण की ऐसी स्थिति देखकर सभी गोपियों की आंखों में आंसू आ गए । …
Read More »सिंहासन बत्तीसी की ग्यारहवीं कहानी – त्रिलोचनी पुतली की कथा!!
हर बार की तरह इस बार भी राजा भोज सिंहासन पर बैठने के लिए राज दरबार पहुंचते हैं। इस बार सिंहासन की ग्यारहवीं पुतली त्रिलोचना उन्हें रोक देती है। फिर वह राजा विक्रमादित्य के गुणों के बारे में बताने के लिए महायज्ञ का एक किस्सा सुनाने लगती है। एक बार राजा विक्रमादित्य ने राज्य की खुशहाली के लिए महायज्ञ करने …
Read More »सिंहासन बत्तीसी की बारहवीं कहानी – पद्मावती पुतली की कथा!!
विक्रमादित्य की खूबियों के बारे में बताने के लिए इस बार बारहवीं पुतली सिंहासन से निकलती है। वह राजाभोज को राजा विक्रमादित्य और एक राक्षस की कहानी सुनाती है। एक दिन राजा विक्रमादित्य अपने राज-पाठ का काम खत्म करके सुहाने मौसम का आनंद उठा रहे थे। तभी उन्हें एक महिला की चीख सुनाई दी। वह मदद के लिए के लिए …
Read More »विक्रम बेताल की बाईसवीं कहानी: चार ब्राह्मण भाइयों की कथा!!
जब राजा विक्रमादित्य ने एक बार फिर बेताल को पकड़ा, तो उसने हर बार की तरह एक नई कहानी शुरू कर दी। बेताल ने कहानी सुनाते हुए राजा विक्रमादित्य से कहा…. कुसुमपुर नाम के एक नगर में एक ब्राह्मण परिवार रहा करता था। ब्राह्मण के परिवार में चार बेटे और उसकी पत्नी थी। ब्राह्मण अपने परिवार के साथ सुखी-सुखी जीवन …
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