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Tag Archives: hindi khaniyan

शेखचिल्ली की कहानी : शाही हुक्का!!

हाफिज नूरानी, शेखचिल्ली के पुराने मित्र थे। नारनौल कस्बे में उनका अच्छा व्यापार था। लेकिन, उनकी बीवी नहीं थी, वे अपनी बड़ी हवेली में बेटे-बहू के साथ रहते थे। बेटे का ब्याह हुए सात साल बीत गए थे, लेकिन उसकी कोई संतान नहीं थी। हाफिज साहब को हमेशा यही फिक्र लगी रहती थी कि खानदान कैसे आगे बढ़ेगा। एक रोज …

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शेखचिल्ली की कहानी : दूसरी नौकरी!!

शेखचिल्ली का काम में मन नहीं लगता था। ऐसे में सही से काम न करने की वजह से शेखचिल्ली के मालिक ने उसे नौकरी से हटा दिया। नौकरी जाने के कारण शेखचिल्ली बहुत दुखी था। अब उसे दूसरी नौकरी चाहिए थी, इसलिए वह दूसरी नौकरी की तलाश करने लगा। नौकरी की तलाश करते-करते एक दिन वह एक सेठ के पास …

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सिंहासन बत्तीसी की दूसरी कहानी – चित्रलेखा पुतली की कथा!!

एक बार मुल्ला नसीरुद्दीन मक्का और मदीना की यात्रा पर निकलते हैं। तीर्थयात्रा करते हुए जब वह मक्का पहुंचे, तो उन्हें मस्जिद के बाहर एक परेशान पर्यटक घूमता दिखा। उस वक्त पर्यटक की नजर भी मुल्ला पर पड़ी। वह तुरंत मुल्ला नसरुद्दीन के पास पहुंचा और कहने लगा कि आप यही के रहने वाले लगते हैं। क्या आपको इस मस्जिद …

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शेखचिल्ली की कहानी : चला ससुराल !!

बहुत समय पहले की बात है एक गांव में शेखचिल्ली नाम का एक युवक रहता था। उसके पिता का बचपन में ही देहांत होने के बाद उसकी मां ने उसे अकेले ही पाल-पोसकर बड़ा किया था। शेखचिल्ली बेहद चुलबुले स्वभाव का था, लेकिन दिमाग से मूर्ख था। एक तो वह और उसकी मां गरीबी में दिन काट रहे थे और …

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शेखचिल्ली की कहानी : खुरपी!!

शेखचिल्ली की मां एक दिन किसी शादी में जाने के लिए घर से बाहर जाने लगी। उन्होंने जाने से पहले अपने बेटे को आवाज देते हुए कहा, “बेटा शेख तुम जंगल जाकर घास ले आना। फिर पड़ोसी को घास देकर पैसे ले लेना। तुम यहां ये काम करो और मैं शादी में जाकर तुम्हारे लिए मिठाइयां लेकर आऊंगी।” शेख चिल्ली …

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शेखचिल्ली की कहानी : नुकसान!!

एक दिन शेखचिल्ली घर में बैठा आराम कर रहा था, तभी उसकी अम्मी बोली बेटा अब तुम बड़े हो गए हो। अब तुम्हें भी कुछ काम-धंधा करके घर खर्च में हाथ बंटाना चाहिए। अम्मी की यह बात सुनकर शेखचिल्ली बोला, “अम्मी मैं कौन-सा काम करूं? मुझमें तो कोई हाथ का हुनर भी नहीं कि उसी से मैं कुछ पैसे कमा …

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शेखचिल्ली की कहानी : ख्याली पुलाव!!

एक दिन मियां शेखचिल्ली सुबह-सुबह बाजार पहुंच गए। बाजार से उसने ढेर सारे अंडे खरीदे और उन्हें एक टोकरी में जमा कर लिया। फिर टोकरी को अपने सिर पर रखकर अपने घर की तरफ चल दिया। पैदल चलते-चलते उसने ख्याली पुलाव बनाने शुरू कर दिए। शेखचिल्ली सोचने लगा कि जब इन अंडों से चूचे निकलेंगे, तो वो उनका बहुत ध्यान …

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सिंहासन बत्तीसी की सोलहवीं कहानी – सत्यवती पुतली की कथा!!

राजा भोज दोबारा सिंहासन पर बैठने के लिए आगे बढ़े। तभी 16वीं पुतली सत्यवती सिंहासन से बाहर आई और राजा भोज को गद्दी पर बैठने से रोकते हुए कहा, “ हे राजन, मैं आपको राजा विक्रमादित्य का एक किस्सा सुनाऊंगी। अगर आपको लगता है कि आप भी उतने ही महान हैं, तो इस सिंहासन पर बैठ जाना।” इतना कहकर 16वीं …

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सिंहासन बत्तीसी की सत्रहवीं कहानी – विद्यावती पुतली की कथा!!

राजा भोज एक बार फिर सिंहासन पर बैठने की इच्छा लेकर राजमहल पहुंचे। इस बार सिंहासन से 17वीं पुतली विद्यावती बाहर निकली और राजा भोज को सिंहासन पर बैठने से रोक दिया। 17वीं पुतली विद्यावती ने कहा, “सिंहासन पर बैठने से पहले राजा विक्रमादित्य की यह कहानी सुन लो।” इतना कहकर 17वीं पुतली ने विक्रमादित्य का किस्सा सुनाना शुरू किया …

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सिंहासन बत्तीसी की अठारहवीं कहानी – तारामती पुतली की कथा!!

18वीं बार फिर राजा भोज सिंहासन पर बैठने के लिए आगे बढ़ें। उन्होंने सोचा कि इस बार चाहे कुछ भी हो जाए, वो सिंहासन पर बैठकर ही रहेंगे। तभी सिंहासन से 18वीं पुतली तारामती बाहर निकली और राजा भोज को रोकते हुए बोली, “सिंहासन पर बैठने से पहले राजा विक्रमादित्य का यह किस्सा सुनिए।” उसके बाद पुतली तारामती ने कहानी …

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