कान्हा तुम्हे मैं समज ना पाई छलियाँ हो या हरजाईया हो मेरे चित चोर के माखन चोरकान्हा तुम्हे मैं समज ना पाई छलियाँ हो या हरजाई बन के ग्वाला गईया चराए यमुना तट पे मुरली बजाएमटकी फोड़े माखन खाए सारी गुजारियो को सताए चले नही किसी का जोर ये माखन चोरकान्हा तुम्हे मैं समज ना पाई छलियाँ हो या हरजाई …
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