रूठ कर मुझसे प्रभु यूँ चले जाओगे तुमये ना सोचा था कभी इतना आज़माओगे तुमरूठ कर मुझसे प्रभु ………….. आदत तो तुम्हारी है दया की ओ दयालुतेरी नाराज़ी को बोलो कैसे मैं सँभालुअपनों बच्चों की खता दिल से यूँ लगाओगे तुमये ना सोचा था कभी इतना आज़माओगे तुमरूठ कर मुझसे प्रभु ………….. मैंने यही देखा मैं तो सुनता यही आयाअपने …
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