सुन राधिका दुलारी में, हूँ द्वार का भिखारी,तेरे श्याम का पुजारी, एक पीड़ा है हमारी ,हमें श्याम न मिला … हम समझे थे कान्हा कही कुंजन में होगा,अभी तो मिलन का हमने सुख नहीं भोगा ओ सुनके प्रेम कि परिभाषा, मन में बंधी थी जो आशा,आशा भई रे निराशा, झूटी दे गया दिलाशाहमें श्याम न मिला… देता है कन्हाई जिसे …
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