एक जंगल में एक शेर रहता था. एक दिन उसे बहुत ज़ोरों की प्यास लगी. वह पानी पीने एक झरने के पास पहुँचा. उसी समय एक जंगली सूअर भी वहाँ पानी पीने आ गया.
शेर और जंगली सूअर दोनों स्वयं को सर्वश्रेष्ठ समझते थे. इसलिए पहले पानी पीकर एक-दूसरे पर अपनी श्रेष्ठता साबित करना चाहते थे. दोनों में ठन गई और लड़ाई शुरू हो गई.
उसी समय कुछ गिद्ध आसमान से उड़ते हुए गुजरे. शेर और जंगली सूअर की लड़ाई देख उन्होंने सोचा कि आज तो दावत पक्की है. इन दोनों की लड़ाई में कोई-न-कोई तो अवश्य मरेगा. फिर छककर उसका मांस खाएंगे. वे वहीं मंडराने लगे
इधर शेर और जंगली सूअर के बीच लड़ाई जारी थी. दोनों पर्याप्त बलशाली थी. इसलिए पीछे हटने कतई तैयार नहीं थे. लड़ते-लड़ते अचानक शेर की दृष्टि आसमान में मंडराते गिद्धों पर पड़ी. वह फ़ौरन सारा माज़रा समझ गया.
लड़ना बंद कर वह जंगली सूअर से बोला, “ऊपर आसमान में देखो. गिद्ध मंडरा रहे हैं. वे हम दोनों में से किसी एक की मौत की प्रतीक्षा में है. लड़ते-लड़ते मरने और फिर गिद्धों की आहार बनने से अच्छा है कि हम आपस में मित्रता कर लें और शांति से पानी पीकर अपने घर लौटें.”
जंगली सूअर को शेर की बात जंच गई. दोनों मित्र बन गए और साथ में झरने का पानी पीकर अपने निवास पर लौट गए.
शिक्षा – आपसी शत्रुता में तीसरा लाभ उठाता है. इसलिए एक-दूसरे के साथ मित्रवत रहें.
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