बरामदे में कुर्सी डालकर बैठे रामनारायण क्यारी में दाना चुगती चिड़ियों को देख रहे थे ! तभी घर के सामने मोटरसाइकिल रुकी ,गणेश आया था ! किसी को लेकर सुकेश उनका बेटा ?अचानक अपने बेटे को आया देख कर पुलकित रामनारायण बाँहे फैला खड़े हो गये !
गणेश तो प्रणाम कर चला गया ! और सुकेश
पिता का स्नेह आशीष पाने के बाद कहा – चलिए बाबूजी मैं आपको लेने आया हूँ ! आप कब तक यहाँ अकेले रहेंगे ! शहर चलिए वहाँ ढंग का फ़्लेट ले लिया है हमने !
सब कुछ इतनी जल्दी हुआ की रामनारायण असमंजस में पड़ गये फिर संभलकर बोले हाँ ,हा ठीक है तुम बैठो तो !
सुकेश तो जैसे जल्दी में था ! नहीं बाबूजी आज शाम को चलना है ! मैंने पैंकिग करने गणेश और समर्थ को बुला लिया है !
पैकिंग हप्ते पंद्रह दिन के लिये क्या पैकिंग करना रामनारायण बड़बड़ाए ,
सुकेश ने सुना तो पलटकर बोला अब वही रहना है ! बाबूजी एक तरफ़ बेटे के स्नेह को समझते और दूसरी तरफ़ अपनी परिवरिश को छोड़ने की घबराहट में रामनारायण बोल पड़े कैसे रह सकूँगा !
तभी उनके परम् मित्र पड़ोसी सुभाष हाँक लगाते हुए दरवाज़े पर खड़े हो गये ! अरे ,भई सुकेश आया है ,तो क्या आज मन्दिर नही चलोगे ?
रामनारायण को अनमना देख सुभाष चुप रह गये ! सुकेश के आने कारण जानकार उन्होंने रामनारायण को चलने का आग्रह किया ।
सुकेश ने उन्हें इशारे से मना किया ..
और बाबूजी को कोने में ले जाकर कहा- बाबूजी आप साथ ना गये तो मैं अपने बेटे शौर्य का कैसे सामना करूँगा । मेरा नही तो पोते शौर्य का अभिन्दन स्वीकार कर लीजिए । जिसने वाद विवाद प्रतियोगिता “वृद्ध क्यों वृद्धआश्रम की ओर अग्रसर” में इस बात पर मेडल जीता कि “जब शरीर अशक्त हो जाए , साथी छोड़ कर चला जाय, तो अपने बच्चे ही काम आते है। लेकिन उन्हें उनकी मन के अनुसार रखना चाहिये।” जब उसने पूछा कि “क्यों पापा मैंने ठीक कहा ना ?” तब पता लगा मुझ से क्या छूट रहा है बाबूजी । सुकेश का गला भर आया ।
बाबूजी आने वाली पीढ़ी वही सिखती है जो देखती है। शौर्य का सपना है कि कोई वृद्ध वृद्धआश्रम की ओर रूख ना करे, चाहे वो अपने पैतृक निवास छोड़ने राज़ी ना हो । अब तो एक बेटा सक्षम है अपने पिता को उनके अनुकूल वातावरण देकर रखने के लिए। देखिए शौर्य ने जीत का ये मेडल आपके लिए भेजा है साथ ही संदेश भी कि दादाजी के दोस्तों से हम समय समय पर हम गाँव मिल आया करेंगे । चलिए अब घर चलते हैं बाबूजी।
रामनारायण ने दोस्तों से विदा लेते कहा अब तक तुम्हारा सहारा था लेकिन अब अपने शरीर के अंग को जुदा नही कर सकता उन्हीं के साथ खुश रह जीवन बिताऊँगा ।
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