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जब हेरो थोरा ने 1 भारतीय किसान से मांगी माफी

हेरो थोरो अमेरिका का एक मशहूर चिंतक और विचारक थे। थोरो भारतीय विचारधारा से प्रेरित थे। उन्हें अपने साहित्य में कालिदास, विष्णु पुराण, हरिवंश पुराण आदि के उदाहरणों को शामिल किया था। भारतीय विचारधारा से प्रभावित होकर, वो भारत में ही एक गांव में पहुंचे।

आश्रम बनाने के लिए उन्होंने एक किसान से जमीन ली थी। लेकिन अगले ही दिन वह किसान वापिस आया और बोला, ‘महोदय आप मेरी जमीन लौटा दें। मैनें अपनी जमीन बहुत सस्ती कीमत में दे दी है। मैं मूर्ख हूं।’

तब थोरो ने कहा, ‘अनजाने में बाजार कीमत से सस्ती जमीन बेच देना सचमुच में मूर्खता है। मैंने यह अपराध किया है। मुझे माफ करें।’ इसलिए में तुम्हारे पैसे और तुम्हारी जमीन लौटा देता हूं। इसके बाद थोरो पास के ही जंगल में आश्रम बनाकर लगभग 2 वर्षों तक रहे और अध्ययन किया।

संक्षेप में

किसी का गलत फायदा नहीं उठाना चाहिए। यह प्रेरक कथा यही सीख देती है। थोरो चाहते तो उस किसान को जमीन नहीं लौटाते, लेकिन वो भारतीय विचारधारा से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने सत्य का साथ दिया।

Hindi to English

Heroes Thoroe was a famous thinker and thinker from America. Thoro was inspired by Indian ideology. He had included examples of Kalidas, Vishnu Purana, Harivansh Purana etc. in his literature. Impressed by Indian ideology, he came to a village in India itself.

He took land from a farmer to make the ashram. But the next day the farmer came back and said, ‘Sir you should return my land. I have given my land in very cheap prices. I’m stupid. ‘

Then Thoro said, ‘Unknowingly it is really foolish to sell cheap land with market value. I have committed this crime. I’m sorry. ‘ Therefore, I return your money and your land. After this Thoro built an ashram in the nearby forest and lived for almost two years and studied.

in short

No one should take advantage of the wrong. This motivational story teaches this. Thoro did not want to return land to that farmer, but he was so influenced by Indian ideology that he supported the truth.

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