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इस मूर्ति का कलाकार कौन?

सुकरात के समय की बात है, उस समय उनके शहर में एक प्रदर्शनी लगी हुई थी। प्रदर्शनी में ग्रीक देवता अपोलो की भव्य मूर्ति स्थापित की गई थी। इस मूर्ति को देखने के लिए यूनान के प्रमुख व्यक्ति जिनमें राजा पैरीक्लीज, रानी एस्पेसिया, विद्वान सोफोक्लीज और स्वयं सुकरात वहां आए हुए थे।

मूर्ति इतनी सुंदर थी कि जो भी उसे देखता तो मूर्ति बनाने वाले कलाकार की प्रशंसा जरूर करता। लेकिन जब कलाकार का नाम राजा पैरीक्लीज ने जानना चाहा। तब वहां उपस्थित लोगों में सन्नाटा सा छा गया। सब हैरान थे। इतनी सुंदर मूर्ति बनाने वाला कलाकार कहां गुम था।

राजा के आदेश पर कलाकार को खोजने के लिए काफी मशक्कत की गई। बड़ी ही कोशिश करने के बाद सैनिकों ने कलाकार को खोज निकाला, वह एक अश्वेत रंग का व्यक्ति था और वह गुलाम था। इस गुलाम ने भगवान अपोलो की पवित्र मूर्ति को बनाया था।

दर्शक दीर्घा में कुछ धर्मगुरु भी खड़े हुए थे। वह जोर-जोर से चिल्लाने लगे। यह अनर्थ हो गया है। कोई गुलाम भगवान अपोलो की मूर्ति को कैसे बना सकता है? इसे तो दंड मिलना चाहिए। इसके हाथ शरीर से अलग कर देना चाहिए।

राजा को धर्मगुरुओं की यह बात बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगी। उन्होंने कहा, ‘भगवान की इतनी सुंदर मूर्ति बनाने वाले के साथ इतना क्रूर में नहीं हो सकता।’ राजा पैरीक्लीज आगे बड़े और उस अश्वेत गुलाम के दोनों हाथों को पकड़कर उसकी हथेलियों को चूम लिया।

इस तरह चाटूकार धर्मगुरु अपनी बात से तुरंत पलट गए और राजा के न्याय की प्रशंसा करने लगे। इस तरह उस कलावान गुलाम को सम्मानित और गुलामी की दास्तां से हमेशा-हमेशा के लिए मुक्त कर दिया गया।

In English

At the time of Socrates, at that time an exhibition was held in his city. The grand statue of the Greek god Apollo was established in the exhibition. To see this statue, the main people of Greece, including King Piriklis, Rani Espacea, scholar Sophocles and Socrates themselves were there.

The idol was so beautiful that anyone who saw it praised the idol making artist. But when the artist’s name, King Pericles, wanted to know. Then there was silence in the people present there. All were surprised. Where was such a beautiful statue artist missing?

On the order of the king, much effort was made to find the artist. After great effort, the soldiers searched the artist, he was a black colored man and he was a slave. This slave had made the sacred statue of Lord Apollo.

Some religious leaders were also standing in the audience gallery. He started shouting loudly. It has become disaster. How can a slave god create an idol of Apollo? It should be punished. Its hands should be separated from the body.

The king did not like this thing of religious leaders at all. They said, ‘With such a beautiful idol of God, it can not be so cruel.’ King Pariklis grabbed both hands of that large black slave and kissed his palms.

 

In this way, the Chaturakar Patthar turned upside down and praised the king’s justice. In this way, the artist’s slave was freed and always be freed from slavery.

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