Tuesday , 30 May 2017
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Aghori Cremation and Phantom Powers

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God Shiv

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भारत में कई ऐसे सिद्ध तांत्रिक आज भी हैं, जो मात्र भभूत एवं आशीर्वाद के द्वारा असाध्य रोगों को ठीक कर देते हैं। तंत्र साधना की दो विधियां हैं- दक्षिणमार्गी और वाममार्गी। दक्षिणमार्गी शुद्ध सात्विक साधना है जबकि वाममार्गी तंत्र साधना अघोरियों के अघोर तंत्र से संबंध रखती है। ये अघोरी श्मशान एवं प्रेत शक्तियों का सहारा लेते हैं। आयुर्वेद ग्रंथों में भूत विद्या का उल्लेख मिलता है। भूत-प्रेत से संबंधित बाधाओं का इलाज औषधियों, जड़ी-बूटियों, खनिजों, पशुओं के नख, चर्म, शृंग आदि के तांत्रिक प्रयोग से किया जाता है। ग्रहों के दुष्प्रभाव को दूर करने के लिए तंत्र-मंत्र का सहारा लिया जाता है। हवन और भस्म भी इसमें सहायक होते हैं । मंत्र जप से मन में तरंगें उत्पन्न होती हैं तथा ऊष्मा बढ़ने पर मस्तिष्क की गुप्त स्मृति का कोष खुल जाता है और मनोरथ पूर्ण हो जाते हैं। तंत्र- मंत्र के द्वारा सर्वविष का इलाज किया जाता है। इनके द्वारा मृतात्माओं से संपर्क किया जाता है। और लोग भूत और भविष्य की घटनाओं को देखने में समर्थ होते हैं। मंत्रों को सिद्ध करने के लिए मुहूर्त का ध्यान रखना अति आवश्यक है। मंत्रों को सिद्ध करने में विशेष पर्वों जैसे होली, दीपावली, दशहरा, नवरात्रि, सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण, शिवरात्रि आदि का विशेष महत्व है क्योंकि उस समय भूमंडल पर ग्रहों एवं नक्षत्रों का प्रभाव विशेष तरंगों के द्वारा एक विशिष्ट ऊर्जा देता है जिससे तंत्र-मंत्र की सिद्धि शीघ्र हो जाती है। तंत्र का संबंध पदार्थ विज्ञान, रसायन शास्त्र, ज्योतिष, आयुर्वेद आदि से भी है। योग से भी इसका घनिष्ठ संबंध है। कुंडली जागरण यद्यपि योग की क्रिया है, लेकिन कुंडली जागरण होने पर व्यक्ति को कई सिद्धियां स्वतः प्राप्त हो जाती हैं। शाबर मंत्रों को भी कलियुग में शीघ्र प्रभावी माना गया है। ये अल्प प्रयास से ही सिद्ध हो जाते हैं। इन मंत्रों को शंकर जी ने जन कल्याण के लिए प्रकट किया है। इन मंत्रों में शास्त्रीय मंत्रों की तरह विनियोग, न्यास, हृदयन्यास आदि की आवश्यकता नहीं पड़ती है। यथा- कलि विलोक जग हित हर गिरिजा। शाबर मंत्र जाल जाहि सिरजा।। आखर अनमिल नाम न जापू।  प्रगट प्रभाव महेश प्रतापू।। -रामचरित मानस मंत्र, तंत्र और यंत्र का प्रयोग जन कल्याण के लिए ही किया जाना चाहिए। इनकी सिद्धि में श्रद्धा , विश्वास, भक्ति, नियम, संयम अति आवश्

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In India, there are many such tantriks today, who cure incurable diseases by mere reverence and blessing. There are two methods of system cultivation: the south-west and the left-wing. The south-east is pure Sattvik sadhana while the  system relates to the awakening system of sadhana ewhariyas. These Aghori resort to cremation and phantom powers. In the Ayurvedic texts the mention of ghosts is found. The obstacles related to the ghost-like are treated by the use of medicines, herbs, minerals, animal nails, skin, shingles etc. through tantric use. Tantra-mantra is used to remove the side effects of planets. Havan and Bhasma are also helpful in this. Mantra jap produces waves in mind and when the heat gets increased, the secret memory of the brain opens and the anxiety becomes complete. Tantra- All cures are treated by Mantra. The dead are contacted by them. And people are able to see ghosts and future events. To prove the mantras, it is very important to take care of Muhurta. Special festivals such as Holi, Deepawali, Dussehra, Navaratri, Solar eclipse, lunar eclipse, Shivratri etc are special significance in proving mantras, because at that time the impact of the planets and constellations on the planet gives a specific energy through special waves, The process of mantra starts fast. The system is also related to materials science, chemistry, astrology, ayurveda etc. It has close connection with yoga too. Although Kundali Jagaran is the action of yoga, but when the horoscope awakens, a person gets many accomplishments automatically. Shabar mantras have also been considered as effective in Kaliyug. They are proven by a little effort. Shankar ji has expressed these mantras for public welfare. These mantras do not require the use of classical mantras like investment, trust, cardiology etc. As per Wilson’s world interest every church Shabar Mantra jal ji sirja .. Aakhar anamil name or japu Revealed effect Mahesh Pratap .. Ramacharit Manas Mantra, Tantra and Yantra should be used only for public welfare. Belief in faith, faith, devotion, rule, patience

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