Monday , 18 December 2017
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पत्थर मारने पर फल मिलते हैं तो धन क्यों नहीं

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एक बार महाराज रणजीत सिंह कहीं जा रहे थे। सामने से एक ईंट आकर उन्हें लगी। सिपाहियों नें चारों ओर नजर दौड़ाई, तो एक बुढ़िया दिखाई दी। उसे गिरफ्तार करके महाराज के सामने हाजिर किया गया।

बुढ़िया महाराज को देखते ही डर गई। वह बोली, सरकार, मेरा बच्चा कल से भूखा था। घर में खाने को कुछ न था। इसलिए पेड़ पर पत्थर मारकर कुछ फल तोड़ रही थी, किंतु एक पत्थर भूलवश आपको लग गया।

वह बोली कि मैं निर्दोष हुं क्यों कि यह गलती मुझसे जानबूझकर नहीं हुई है। महराज ने कुछ देर सोचा और कहा कि बुढ़िया को एक हजार रुपया देकर सम्मान पूर्वक विदा किया जाए। तब सभी दरबारी चुप हो गए। तब एक मंत्री ने पूछा जिसे दंड मिलना चाहता उसे आप सम्मान दे रहे हैं।

तब रणजीत सिंह बोले कि, यदि वृक्ष पत्थर लगने पर मीठा फल दे सकते है तो पंजाब का महाराज उसे खाली हाथ कैसे लौटा सकता है?

In English

Once Maharaj Ranjeet Singh was going somewhere. They got a brick coming from the front. The soldiers looked around and looked an old man. He was arrested and presented before the King.

The old lady was scared to see. That bid, the government, my child was hungry yesterday. There was nothing to eat at home. So you were breaking some fruit by stoning the tree, but you were mistaken for a stone.

She said that I am innocent because this mistake has not happened to me deliberately. Maharaj thought for a while and said that the old lady should be given a thousand rupees to be respected. Then all the court officers became silent. Then a minister asked who you wanted to get the punishment, you are honoring him.

Then Ranjit Singh said that if the tree can give sweet fruit on the stone, how can the king of Punjab return it empty handed?

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