Monday , 18 December 2017
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जानिए कबीरदास की बेबाक सोच

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एक बार रामानंद जी ने कबीरदास से कहा, श्राद्ध के दिन चल रहे हैं। पितरों का तर्पण करना है। इसलिए पितरों के लिए खीर बनाने का प्रबंध करो।’ कबीरदास जी खीर के लिए दूध लेने चल दिए। उस समय कबीरदास जी की उम्र महज 9 वर्ष थी।

कबीर दास ने बाजार से दूध लिया और थोड़े आगे चले ही थे कि उन्हें एक बीमार गाय दिखाई दी। वह जमीन पर लेटी तड़प रही थी। कबीरदास वहां रुके और आस-पास मौजूद घास उखाड़कर गाय को खिलाने लगे।

उधर, पितरों की पूजा करने का समय बीता जा रहा है। तब रामानंदजी कबीरदास को खोजने चल दिए। वह आगे चले तो उन्होंने देखा कि कबीरदास एक बीमार गाय के पास बैठे उसकी सेवा कर रहे थे।

रामानंद जी ने अपने शिष्य कबीरदास से कहा, कबीर आप दूध लेने गए थे। और इस बीमार गाय जो कुछ देर बाद मृत हो जाएगी। उसकी सेवा कर रहे हो। तब कबीरदास ने कहा, स्वामी जी ये तो गाय है। जो कुछ समय बाद मर जाएगी। मैं इसे घास खिलाने की कोशिश कर रहा हूं। जो नहीं खा रही है। लेकिन आपके तो 100 वर्षों पहले मृत पितर खीर कैसे खाएंगे?

Hindi to English 

Once Ramanand ji told Kabirdas, he is walking on the day of Shraddha. Fathers are to be sacrificed. So make arrangements for making kheer for the ancestors. ‘ Kabirdas ji to take milk for Kheer. At that time Kabirdas ji was only 9 years old.

Kabir Das took milk from the market and walked a little ahead that he saw a sick cow. He was lying down on the ground. Kabirdas stayed there and began to feed the cow by uprooting grass near it.

On the other hand, the time for worshiping the ancestors is being spent. Then Ramanandji went to find Kabirdas. When he went further, he saw that Kabirdas was serving him while sitting near a sick cow.

Ramanand ji told his disciple Kabirdas, Kabir went to take milk. And this sick cow will die after some time. Serving him Then Kabirdas said, Swamiji, this is a cow. Which will die later. I am trying to feed it grass. Which is not eating But how will you eat dead pigeon kheer 100 years ago?

 

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