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जय श्री राम और जय हनुमान

एक दिन सुबह सुबह दरवाजे की घंटी बजी । दरवाजा खोला तो देखा एक आकर्षक कद- काठी का व्यक्ति चेहरे पे प्यारी सी मुस्कान लिए खड़ा हैं ।मैंने कहा, “जी कहिए..”तो उसने कहा,अच्छा जी, आप तो रोज़ हमारी ही गुहार लगाते थे,मैंने कहा“माफ कीजिये, भाई साहब ! मैंने पहचाना नहीं, आपको…”तो वह कहने लगे,“भाई साहब, मैं वह हूँ, जिसने तुम्हें …

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#पीपल : केवल पेड ही नहीं

अकेला ऐसा पौधा जो दिन और रात दोनो समय आक्सीजन देता है।पीपल के ताजा 6-7 पत्ते लेकर 400 ग्राम पानी मे डालकर 100 ग्राम रहने तक उबाले,ठंडा होने पर पिए ब्रर्तन स्टील और एल्युमिनियम का नहीं हो, आपका ह्रदय एक ही दिन में ठीक होना शुरू हो जाएगा..पीपल के पत्तो पर भोजन करे,लीवर ठीक हो जाता है…पीपल के सूखे पत्तों …

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वक्त है बदलाव का

मंदी क्यों है व्यापार में ???बर्तन का व्यापारी परिवार के लिये जूते ऑनलाइन खरीद रहा है…जूते का व्यापारी परिवार के लिये मोबाइल ऑनलाइन खरीद रहा है…मोबाइल का व्यापारी परिवार के लिए कपडे ऑनलाइन खरीद रहा है…कपड़े का व्यापारी परिवार के लिये घड़ी ऑनलाइन ख़रीद रहा है…घडी का व्यापारी बच्चों के लिए खिलोने ऑनलाइन ख़रीद रहा है…खिलोने का व्यापारी घर के …

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सिंहासन बत्तीसी की 28वीं कहानी – वैदेही पुतली की कथा!!

लगातार 27 पुतलियों से राजा विक्रमादित्य की महानता की कहानी सुनकर परेशान हो चुके राजा भोज ने एक बार फिर सिंहासन पर बैठने की कोशिश की। वह जैसे ही सिंहासन पर बैठने गए, तभी 28वीं पुतली वैदेही ने उन्हें रोका और राजा विक्रमादित्य की स्वर्ग यात्रा और इस दौरान उनके द्वारा किए गए पुण्य कार्यों का किस्सा बताना शुरू किया। …

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सिंहासन बत्तीसी की 29वीं कहानी – मानवती पुतली की कथा!!

सिंहासन का महत्वाकांक्षी राजा भोज 29वीं बार सिंहासन पर बैठने की कोशिश करता है। वह जैसे ही सिंहासन पर बैठने जाता है, तभी 29वीं पुतली मानवती उसे रोकती है और राजा विक्रमादित्य की एक कहानी सुनाने लगती है। इस बार कहानी राजा की बहन की शादी की है। आइए जानते हैं कि इस किस्से में 29वीं पुतली ने क्या सुनाया …

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सिंहासन बत्तीसी की 30वीं कहानी – जयलक्ष्मी पुतली की कथा!!

अलग-अलग पुतलियों की उलाहना सुन-सुनकर थक चुका राजा भोज हिम्मत करके 30वीं बार भी सिंहासन पर बैठने जाता है, लेकिन इस बार उसे 30वीं पुतली जयलक्ष्मी रोकती है और कहती है कि अगर तुम राजा विक्रमादित्य की तरह तपस्वी हो, तो ही इस सिंहासन पर बैठो। यह कहते हुए 30वीं पुतली जयलक्ष्मी उसे राजा विक्रमादित्य के तपस्वी होने से जुड़ी …

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सिंहासन बत्तीसी की 31वीं कहानी – कौशल्या पुतली की कथा!!

जब 30 बार असफल रहने के बाद एक बार फिर राजा भोज सिंहासन पर बैठने की कोशिश करते हैं, तो 31वीं पुतली कौशल्या वहां प्रकट होती है। वह राजा भोज से कहती है, “इस सिंहासन पर तुम तभी बैठ सकते हो, जब राजा विक्रमादित्य जैसे गुण तुम में हों।” इसके साथ ही 31वीं पुतली राजा भोज को राजा विक्रमादित्य की …

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नटखट परी और जादुई गुफा की कहानी!!

एक समय की बात है एक बहुत ही नटखट परी थी। वह पूरी दुनिया देखना चाहती थी। यह सोचकर वह अपने सभी लोगों से अलग हो गई। वह हर दिन बहुक दूर-दूर तक जाती और नए लोग व नई दुनिया देखती थी। एक दिन वह उड़ती हुई एक घर के पास पहुंची। वहां पर वह खिड़की के पास छिप गई। …

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राजकुमारी और मटर की कहानी!!

किसी राज्य में एक बहुत ही बलवान राजा का राज चलता था। उसकी रानी भी बहुत सुंदर और समझदार थी। राजा-रानी को एक पुत्र था। दोनों मे अपने पुत्र के पालन-पोषण से लेकर, उसकी शिक्षा-दीक्षा में किसी तरह की कोई कमी नहीं होने दी थी। राजुकमार भी बहुत सुंदर था। उसका व्यवहार विनम्र था और वह हर से एक सुयोग्य …

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रॅपन्ज़ेल की कहानी!!

एक समय की बात है, जर्मनी के एक गांव में जॉन नाम का एक आदमी रहता था। उसकी पत्नी का नाम नैल था। वो दोनों निसंतान थे। उनकी इच्छा थी कि उन्हें भी एक प्यारा-सा बच्चा हो जाए। इसके लिए वो रोज भगवान से प्रार्थना करते थे। एक दिन भगवान ने उनकी प्रार्थना सुन ली और नैल गर्भवती हो गई। …

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