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दीप जलाकर देखो

तीर्थंकर महावीर से एक दिन एक श्रद्धालु ने पूछा, ‘भगवन्, मैं सभी व्रतों का यथासंभव पालन करता हूँ। अर्जित धन का एक अंश दान करता हूँ, उपवास भी करता हूँ, किंतु कभी-कभी ऐसा लगता है कि जीवन व्यर्थ जा रहा है। मन की शांति के लिए क्या करना चाहिए?’ यह सुनकर महावीर ने उसी से प्रश्न किया, ‘क्या केवल धन …

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मानवता का गुण

ऋग्वेद का एक मंत्र है- मनुर्भव अर्थात् मनुष्य बनो। वैदिक विद्वान् वेदमूर्ति पं. सातवलेकर ने एक सभा में जब मंत्र दोहराया-मनुर्भव, तो एक सज्जन ने पूछा, ‘क्या सभा में उपस्थित लोग मनुष्य नहीं हैं?’ पंडित सातवलेकरजी ने कहा, ‘भाई! हर जीव के कुछ लक्षण होते हैं। यदि मानवता नहीं है, तो कोई मानव कैसे कहला सकता है? लक्षणों से ही …

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आचरण के बिना व्यर्थ

दार्शनिक राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन स्वयं शिक्षक रहे थे। वह कहा करते थे, वही शिक्षा सार्थक कही जाएगी, जो सदाचारी व संस्कारी बनने की प्रेरणा देती है। संस्कारहीन शिक्षा प्राप्त व्यक्ति को यह विवेक नहीं रहता कि क्या करने में कल्याण है। इसलिए शिक्षा के साथ-साथ आचरण की शुचिता पर आवश्य ध्यान देना चाहिए। रावण ने सोने की लंका बनाई। …

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ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति

धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि प्रत्येक प्राणी में परमात्मा के दर्शन करनेवाला और प्रत्येक जीव से प्रेम करनेवाला सच्चा ब्रह्मज्ञानी होता है। एक दिन ब्रह्मनिष्ठ संत उड़िया बाबा गंगा तट पर श्रद्धालुओं को उपदेश दे रहे थे। उन्होंने अचानक दोनों हाथों से गंगाजी की बालुका (रेती) उठाई और पास बैठे भक्त को संबोधित करते हुए कहा, ‘शांतनु, जब तक …

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सच्चे सुख की तलाश

अधिकांश लोग भौतिक सुविधाओं को सुख का साधन मानते हैं, इसलिए ‘सुख-सुविधा’ शब्द का प्रायः एक साथ उपयोग किया जाता है। सुख पाने के लिए मानव अत्याधुनिक भौतिक साधनों की खोज में लगा रहता है। किंतु देखने में आता है कि असीमित सुविधाओं से संपन्न व्यक्ति भी कहता है, ‘मुझे आत्मिक सुख-शांति नहीं मिल पा रही है।’ सुख-शांति की खोज …

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कमली वाले की महफ़िल सजी है

उनकी रेहमत का झूमर सजा हैकमली वाले की महफ़िल सजी है| तेरे दर से ना जाऊँगा खालीबाते यही पे आके रुकी हैकमली वाले की महफ़िल सजी है| तुझे अपना समज के मैं आयाआके देखो तो दुनिया पड़ी हैउनकी रहमत का झूमर लगा हैहो दीवानों की महफ़िल सजी हैकमली वाले की महफ़िल सजी है| नही चाहिए ये दुनिया के उजालेतेरी सूरत …

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जिन्हें देखने को जिए जा रहे हैं

जिन्हें देखने को जिए जा रहे हैंवो पर्दे पे पर्दा किए जा रहे हैं,निकल आओ पर्दे से बाँके बिहारी,हमें तेरा पर्दा गवारा नही है| बताओ यों पर्दों में कब तक छिपोगे,तुम्हें मुख से पर्दा हटाना पड़ेगा,मुबारक रहे तुमको मेरी मोहब्बत,तुम्हे सामने मेरे आना पड़ेगा| तुम मेरे पास बैठो तसल्ली न हो,वक्त मेरा भी अच्छा गुजर जायेगा,ये क्या कम है कन्हैया …

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साँवरे तूने नहीं झुकने दिया

माँगू मैं क्या, क्या नहीं तुमने दिया,साँवरे तूने नहीं, झुकने दिया…. जब से मेरे सर तुम्हारा हाथ है,ठोकरों में भी नहीं गिरने दिया,मुझको तूने ना कहीं, झुकने दिया,माँगू मैं क्या, क्या नहीं तुमने दिया,साँवरे तूने नहीं, झुकने दिया…. आँधियों मैं हम भी मिट जाते मगर,साँवरे तुमने नहीं मिटने दिया,मुझको तूने ना कहीं, झुकने दिया,माँगू मैं क्या, क्या नहीं तुमने दिया,साँवरे …

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नंदकिशोरा चित्तचकोरा

कान्हा ओ कान्हा कान्हा रे कान्हा…… नंदकिशोरा, चित्तचकोरा गोकुळतारा, मनमोहन तूबावरी राधा मी ब्रिजबालाप्रेम रसाची ओढ जीवालाकृष्ण कन्हैया अशीलाविसी तू नंदकिशोरा, चित्तचकोरागोकुळतारा, मनमोहन तूकृष्णा कृष्णा, हरे कृष्णाराधे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा……. वृंदावनी गोप-गौळणी घेऊनिया धुंद रास खेळसीतू पानांतुनी वेलीतुनीबासुरीचे गोड छेडीसी तूयाच सुरांनी मोहुनीगेले पाहुनी तुजला मी तुझीझाले वेड मनाला असे लाविसीतू नंदकिशोरा, चित्तचकोरागोकुळतारा, मनमोहन तू राधा तुझी, मीरा तुझीहोईन मी …

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न ठोकर मार दासी हूं

न ठोकर मार दासी हूं मैं दुनिया की सताई हूं दिए अपनो ने धोखे श्यामदिए अपनो ने धोखे श्यामयह दुनिया पैसे वालों की मैं खाली हाथ आई हूं पड़ी नैया भंवर में श्यामकिनारा दूर है मेरा खिवैया आप बन जाओ तो बेड़ा पार हो जाए मुझे अपना बना लो श्यामया इस जग से उठा लो श्यामतुम्हें पाने की हसरत में मैं बंधन तोड़ आई हूं …

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