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हर परिस्थिति में प्रसन्न रहकर ही हम ईश्वर के समीप पहुंच सकते हैं

दो संन्यासी थे, एक वृद्ध और एक युवा । दोनों साथ रहते थे । एक दिन महीनों बाद वे अपने मूल स्थान पर पहुंचे । जो एक साधारण-सी झोपड़ी थी । किंतु जब दोनों झोपड़ी में पहुंचे तो देखा कि वह छप्पर भी आंधी और हवा ने उड़ाकर न जाने कहां पटक दिया । यह देख युवा संन्यासी बड़बड़ाने लगा …

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The Power of Memories

हम सभी को स्मृति का आभास होता है कि अतीत में या उससे परे हमारे साथ क्या हुआ था, और कभी-कभी हमारे पास जो कुछ हुआ है उसकी स्मृति होती है, लेकिन इस समय और स्थान में नहीं। इसे अनारकय कर्म कहा जाता है। याददाश्त बहुत जरूरी है। याद रखने के लिए कि हम मानव हैं, बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन …

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आपको गुस्सा कोई नहीं दिला सकता

बहुत समय पहले की बात है। एक व्यक्ति किसी गांव में रहता था। लोग कहते थे कि उसे गुस्सा नहीं आता था। इस दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें सिर्फ फिजूल की बातें ही सूझती हैं। ऐसे ही व्यक्तियों में से किसी एक ने निश्चय किया कि उस गुस्सा न आने वाले सज्जन को गुस्सा दिलाया जाए। …

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नहीं मालूम तो बता दें ‘आलू’, ‘अंडे’ और ‘कॉफी’ में भी होती है समझ

एक बार एक बेटी ने अपने पिता से कहा, ‘ यह समय कितना कठिन है। मैं अब भीतर ही भीतर टूट गई हूं। जब तक हम एक मुसीबत से दो-चार होते हैं, तब तक नई मुसीबतें खड़ी हो जाती हैं। ऐसा कब तक चलेगा?’ उस लड़की के पिता हलवाई थे। वह बिना कुछ कहे उन्होंने सामने रखे चूल्हे पर तीन …

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तोल-मोल कर बोलें बोल, हर समस्या होगी गोल

तोल-मोल कर बोलें बोल, हर समस्या होगी गोल

स्वामी विवेकानंद बचपन से ही साहसी और निडर बालक थे। उनके बचपन का नाम नरेंद्र था। एक बार वह अपने दोस्त के यहां खेलने गए। तब उनकी उम्र 8 साल थी। मित्र के घर चंपा का पेड़ था। नरेंद्र को उस पर लटक कर खेलना काफी पसंद था। हर दिन की तरह उस दिन भी उसी पेड़ पर चढ़कर नरेंद्र …

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छोटी बुराई, बड़ी बुराई के लिए रास्ता खोलती है

नौशेरवां ईरान का बड़ी ही न्यायप्रिय बादशाह था। छोटी सी छोटी चीजों में भी न्याय की तुला उसके हाथ में रहती थी। सबसे अधिक ध्यान वह अपने आचरण पर रखता था। एक बार बादशाह जंगल की सैर करने गया। उसके साथ कुछ नौकर चाकर भी थे। घूमते-घूमते वह शहर से काफी दूर निकल आए। इस बीच बादशाह को भूख लगी। …

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भगवान ऐसे लोगों को सद्बुद्धि दें

भगवान ऐसे लोगों को सद्बुद्धि दें

एक संत थे। वह प्रातः काल अपने शिष्यों के बीच बैठकर प्रभु से प्रार्थना किया करते थे। वह सबसे पहले पूरी मानव जाति के कल्याण की प्रार्थना करते और इसके बाद हाथ जोड़कर कहते कि, हे प्रभु मेरे परमपिता, आप गलत कार्य करने वाले लोगों को सद्बुद्धि दें। उनको सही रास्ता दिखाएं ताकि वो गलत कामों को छोड़कर दया का …

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चन्दन के कोयले न बनाओ

*सुनसान जंगल में एक लकड़हारे से पानी का लोटा पीकर प्रसन्न हुआ राजा कहने लगा – हे पानी पिलाने वाले ! किसी दिन मेरी राजधानी में अवश्य आना, मैं तुम्हें पुरस्कार दूँगा, लकड़हारे ने कहा – बहुत अच्छा।**इस घटना को घटे पर्याप्त समय व्यतीत हो गया, अन्ततः लकड़हारा एक दिन चलता-फिरता राजधानी में जा पहुँचा और राजा के पास जाकर …

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बड़े काम की है सुखदा मणि

बहुत पुरानी बात है। एक संत थे। धर्म में श्रद्धा के कारण वह हमेशा खुश रहते थे। उनके चेहरे से उल्लास टपकता था। एक बार कुछ चोरों ने समझा कि संत के पास कोई बड़ी दौलत है, अन्यथा हर घड़ी इतने प्रसन्न रहने का और क्या कारण हो सकता है? अवसर पाकर चोरों ने संत का अपहरण कर लिया, जंगल …

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भक्त और भगवान का एक प्यारा रिश्ता

vभक्त और भगवान का एक प्यारा रिश्ता

कृष्णा हर दिन एक बाग़ में जाया करते थे और उस बाग़ के सभी पुष्पों को प्यार किया करते थे | बदले में वे सभी पुष्प भी कृष्णा की तरफ अपना प्यार दर्शाया करते थे | उन सभी पुष्पों के चेहरों पर कृष्ण को देखकर एक मधुर मुस्कान आ जाया करती थी | उसी बाग़ में एक बबूल का पेड़ …

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