पुराने समय में तप और मेहनत से ज्ञान प्राप्त करने वालों को श्रमण कहा जाता था। जैन धर्म प्राचीन भारतीय श्रमण परम्परा से ही निकला धर्म है। ऐसे भिक्षु या साधु, जो जैन धर्म के पांच महाव्रतों का पालन करते हों, को ‘जिन’ कहा गया। हिंसा, झूठ, चोरी, ब्रह्मचर्य और सांसारिक चीजों से दूर रहना इन महाव्रतों में शामिल हैं। …
Read More »Gyan Ganga
श्री कृष्ण चालीसा
श्री कृष्ण चालीसा (Shri Krishna Chalisa in Hindi) ॥दोहा॥ बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम। अरुण अधर जनु बिम्बफल, नयन कमल अभिराम॥ पूर्ण इन्द्र, अरविन्द मुख, पीताम्बर शुभ साज। जय मनमोहन मदन छवि, कृष्णचन्द्र महाराज॥ जय यदुनंदन जय जगवंदन।जय वसुदेव देवकी नन्दन॥ जय यशुदा सुत नन्द दुलारे। जय प्रभु भक्तन के दृग तारे॥ जय नटनागर, नाग नथइया॥ कृष्ण …
Read More »चाणक्य
यदि दुनिया में कोई महान राजनीतिज्ञ कभी हुआ था तो वे थे आचार्य चाणक्य, यही कहती है सारी दुनिया और यही मानते हैं सभी लोग। चाहे प्राचीन काल हो या आज का युग, आज भी लोग एक महान राजनीतिज्ञ बनने के लिए आचार्य चाणक्य द्वारा बताए गए उसूलों पर चलना चाहते हैं। यह दुनिया उनसे एक सफल इंसान और बुद्धिमान …
Read More »श्री लक्ष्मी चालीसा
॥ दोहा॥ मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास। मनोकामना सिद्घ करि, परुवहु मेरी आस॥ ॥ सोरठा॥ यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुं। सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका॥ ॥ चौपाई ॥ सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही। ज्ञान बुद्घि विघा दो मोही ॥ तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरवहु आस हमारी॥ जय जय जगत जननि …
Read More »जानिए सिख धर्म को (Know Sikhism)
सिख धर्म का उदय गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं के साथ होता है। सिख का अर्थ है शिष्य। जो लोग गुरु नानक जी की शिक्षाओं पर चलते गए, वे सिख हो गए। यह धर्म विश्व का नौवां बड़ा धर्म है। भारत के प्रमुख चार धर्मों में इसका स्थान भी है। सिख धर्म की पहचान पगड़ी और अन्य पोशाकों से …
Read More »चाणक्य नीति : दसवां अध्याय (Chanakya Niti: tenth chapter)
जिसके पास धन नहीं है वो गरीब नहीं है, वह तो असल में रहीस है, यदि उसके पास विद्या है. लेकिन जिसके पास विद्या नहीं है वह तो सब प्रकार से निर्धन है. हम अपना हर कदम फूक फूक कर रखे. हम छाना हुआ जल पिए. हम वही बात बोले जो शास्त्र सम्मत है. हम वही काम करे जिसके बारे …
Read More »गौतम बुद्ध
बौद्ध धर्म के संस्थापक भगवान बुद्ध थे। एक राज परिवार में जन्मे राजकुमार सिदार्थ से लेकर भगवान बुद्ध बनने तक सफर बेहद रोचक रहा। गौतम बुद्ध बौद्ध लुम्बावनी के राजा शुद्धोधन और रानी महामाया के पुत्र थे। इनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था। आत्म ज्ञान की प्राप्ति के बाद इन्हें महात्मा गौतम बुद्ध के नाम से जाना जाने लगा। माना …
Read More »चाणक्य नीति: नवां अध्याय (Chanakya Niti eighth chapter)
तात, यदि तुम जन्म मरण के चक्र से मुक्त होना चाहते हो तो जिन विषयो के पीछे तुम इन्द्रियों की संतुष्टि के लिए भागते फिरते हो उन्हें ऐसे त्याग दो जैसे तुम विष को त्याग देते हो. इन सब को छोड़कर हे तात तितिक्षा, ईमानदारी का आचरण, दया, शुचिता और सत्य इसका अमृत पियो. वो कमीने लोग जो दूसरो की …
Read More »जानिए बौद्ध धर्म को
वैशाख की पूरे चाँद की रात थी जब बोध गया में एक पेड़ के नीचे ध्यान लगा के बैठे सिद्धार्थ ने परम को जाना। महज़ 35 साल की उम्र में वे बुद्ध बन गए। यह घटना ईसा के 528 साल पहले की बताई जाती है। महात्मा बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद 4 सप्ताह तक बोधिवृक्ष (जिस वृक्ष के नीचे …
Read More »चाणक्य नीति: आठवां अध्याय (Chanakya Niti eighth chapter)
नीच वर्ग के लोग दौलत चाहते है, मध्यम वर्ग के दौलत और इज्जत, लेकिन उच्च वर्ग के लोग सम्मान चाहते है क्यों की सम्मान ही उच्च लोगो की असली दौलत है. दीपक अँधेरे का भक्षण करता है इसीलिए काला धुआ बनाता है. इसी प्रकार हम जिस प्रकार का अन्न खाते है. माने सात्विक, राजसिक, तामसिक उसी प्रकार के विचार उत्पन्न …
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पौराणिक कथाओं, प्रेरक क्षण, मंदिरों, धर्मों, फिल्मों, हस्तियों के बारे में दिलचस्प जानकारी, हजारों गाने, भजन, आरती के बोल हैं Your wish may come true today…