Breaking News

Gyan Ganga

श्रीकृष्ण और द्रौपदी

shree krshn aur draupadee

पांडव महिषी सती द्रौपदी भगवान श्रीकृष्ण को परम बंधु भाव से पूजती थी । भगवान भी द्रौपदी के साथ असाधारण स्नेह रखते और उसकी प्रत्येक पुकार का तुरंत उत्तर देते थे । भगवान के अंत:पुर में द्रौपदी का और द्रौपदी के महलों में भगवान का जाना – आना अबाध था । जिस प्रकार भगवान का दिव्य प्रेम भी अलौकिक था …

Read More »

श्रीकृष्ण और भावी जगत

vyarth hai moh ka bandhan

  मनुष्य को आदि से सुख और शांति की खोज रही है और अंत तक रहेगी । मानव सभ्यता का इतिहास इसी खोज की कथा है । किस जाति ने इस रहस्य को जितना अधिक समझा वह उतनी ही सभ्य, जितना ही कम समझा उतनी ही असभ्य समझी जाती है । लोग भिन्न – भिन्न मार्गों से चले । किसी …

Read More »

Apana

SITALI KRIYA

  Accueil >> Le Kundalini Yoga >> Yogi BHAJAN >> Où pratiquer le Kundalini Yoga ? >> Stages et évènements >> Le Festival de Yoga >> Exercices et méditations >> Livres et manuels >> Devenir professeur de KY >> En savoir plus sur la FFKY >> Structure Internationale (3HO) >> Fédération Internationale (IKYTA) >> “The Aquarian Teacher” en français >> …

Read More »

श्री शबरी जी की भक्ति

shree shabaree jee kee bhakti

सबको परमगति प्रदान करते हुए उदारशिरोमणि भगवान शबरी को भी गति देने के लिए उसके आश्रम में पधारे । ‘आश्रम’ शब्द से शबरी जी का विरक्त होना सूचित किया गया है, क्योंकि वन में बहुत – से कोल – किरात आदि भी निवास करते हैं, परंतु उनके घरों को कभी ‘आश्रम’ नहीं कहा जाता । शबरी जी मन, वचन और …

Read More »

श्रीकृष्ण – चरण सेवन का माहात्म्य

raam-maryaada2

ब्रह्मा जी श्रीभगवान से कहते हैं – ‘हे देव ! जो लोग आपके उभय चरण – कमलों के प्रसाद का लेथ पाकर अनुगृहीत हुए हैं, वे भक्तजन ही आपकी महिमा के तत्त्व को जान सकते हैं, उनके सिवा अन्य कोई भी चिरकाल तक विचार करने पर भी आपके तत्त्व को नहीं जान सकता ।’ यमराज अपने दूतों से कहते हैं …

Read More »

सुदर्शन पर जगदंबा की कृपा

ghoonghat ka pat khol re

अयोध्या में भगवान राम से कुछ पीढ़ियों बाद ध्रुवसंधि नामक राजा हुए । उनकी दो स्त्रियां थीं । पट्टमहिषी थी कलिंगराज वीरसेन की पुत्री मनोरमा और छोटी रानी थी उज्जयिनी नरेश युधाजित की पुत्री लीलावती । मनोरमा के पुत्र हुए सुदर्शन और लीलावती के शत्रुजित । महाराज की दोनों पर ही समान दृष्टि थी दोनों राजपुत्रों का समान रूप से …

Read More »

Poumons

SITALI KRIYA

  Accueil >> Le Kundalini Yoga >> Yogi BHAJAN >> Où pratiquer le Kundalini Yoga ? >> Stages et évènements >> Le Festival de Yoga >> Exercices et méditations >> Livres et manuels >> Devenir professeur de KY >> En savoir plus sur la FFKY >> Structure Internationale (3HO) >> Fédération Internationale (IKYTA) >> “The Aquarian Teacher” en français >> …

Read More »

शिव और सती

Pardosh Vart Ka Mahtav Story

सिव सम को रघुपति ब्रतधारी । बिनु अघ तजी सती असि नारी ।। भगवान शिव और माता सती देवी की असीम महिमा बड़े ही सुंदर ढंग से प्रतिपादित की है । भगवान शिव के लिए है क्योंकि संसार में सब धर्मों का सार, सब तत्त्वों का निचोड़ भगवत्प्रेम ही निश्चय किया गया है । भगवान परब्रह्म में दृढ़ निष्ठा का …

Read More »

लोकसंग्रह और भगवान श्रीकृष्ण

krisna-and-loksangrah2

लोकसंग्रह की पद्धति ठीक तरह से समझ में आ जाएं, इसके लिए एक नियम है, और वह यह है कि जिस प्रकार अज्ञानी पुरुष मन में धन और कीर्ति की अभिलाषा रखकर, स्वार्थ के लिए, पूरी सावधानी के साथ कर्म करता है उसी प्रकार ज्ञानी पुरुष को भी उतनी ही सावधानी के साथ, पर निष्काम बुद्धि से कर्म करना चाहिए …

Read More »

भगवान शिव का हरिहरात्मक रूप

krshnadarshan - bhagavaan shiv ke avataar

एक बार सभी देवता भगवान विष्णु के पास गये और उन्हें नमस्कार करने के बाद संपूर्ण जगत के अशांत होने का कारण पूछा । देवताओं के प्रश्न करने पर भगवान विष्णु ने कहा – ‘देवताओं ! हम तुम्हारे इस प्रश्न का यथोचित उत्तर नहीं दे सकते । हम सभी लोगों को एक साथ मिलकर भगवान शंकर के पास चलना चाहिए …

Read More »