क्षुद्रबुद्धि दक्ष ने स्वयं सदाशिव से द्रोह करने की हिम्मत की थी। शिव तत्व के ज्ञान से हीन पशु के समान दक्ष को अपनी इस करनी की सजा प्राप्त हुई। मां सती के योगाग्नि में भस्म हो जाने से अतिक्रोधित महादेव के आदेश से वीरभद्र ने दक्ष का यज्ञ नष्ट करके उसका सिर काट दिया। ब्रह्मा, विष्णु सहित देवताओं की …
Read More »Religion Information
तोड़ नहीं पाया कोई श्याम का रिकॉर्ड
सारे देवताओं में है बांटने की होड़ जी, तोड़ नहीं पाया कोई श्याम का रिकॉर्ड जी, सारे देवताओं में है बांटने की होड़ जी | बैठ के हिसाब लगा कर के देखा, जोड़ कर के देखा,घटा कर के देखा, निकला ये हिसाब मेरा बाबा है बेजोड़ जी, सारे देवताओं में है बांटने की होड़ जी, तोड़ नहीं पाया कोई श्याम …
Read More »मर्ज़ी तेरी है थामो ना थामो मेरा हाथ
मर्ज़ी तेरी है थामो ना थामो मेरा हाथ मैंने सुना है सबसे हारे का साथी बनके देते तुम साथअखबारों में रोज मैं देख रहा जाते हो तुम कान्हा कहाँ कहाँ खातिर वो ज्यादा करते या तुम हो उनसे डरते बतलाओ श्याम मर्ज़ी तेरी है थामो ना थामो मेरा हाथ एक बात मैं तुमसे पुछूं श्याम मांझी बनने का लेते क्या …
Read More »यह बंदा तेरे चरणों का दास रहे
हर युग में तेरा ही वास रहे, यह बंदा तेरे चरणों का दास रहे । श्याम से अपना अटूट हैं बंधन, कोई तोड़ ना पाए, नहीं घबराता दिल मेरा चाहे कैसा भी वक़्त आए । तेरे चरणों में मेरी सुबह और श्याम रहे, यह बंदा तेरे चरणों का दास रहे ॥ दाताओं का दाता है यह, देता है बिन बोले, …
Read More »है धन्य तेरी माया जग में शिव शंकर डमरू वाले
नमामि शंकर, नमामि हर हर, नमामि देवा महेश्वरा । नमामि पारब्रह्म परमेश्वर, नमामि भोले दिगम्बर ॥ है धन्य तेरी माया जग में, ओ दुनिए के रखवाले शिव शंकर डमरू वाले, शिव शंकर भोले भाले जो ध्यान तेरा धर ले मन में, वो जग से मुक्ति पाए भव सागर से उसकी नैया तू पल में पर लगाए संकट में भक्तो में …
Read More »हे शिवशंकर नटराजा
निसदिन करता मैं नाम जपन तेरा, शिव शिव शिव शिव गुंजत मन मोरा । तुम हो मरे प्रभु, तुम ही कृपालु, करूँ समर्पण दीन दयालु ॥ तोरी जटा से बहती पवित्रता, तीन्ही लोको के तुम हो दाता । डमरू बजाया, तमस भगाया, जड़ चेतन को तुम्ही ने जगाया ॥ अलख निरंजन शिव मोरे स्वामी, तुम ही हो मेरे अंतरयामी । …
Read More »परंपरा का निर्माण
जीवन के साथ आयुर्वेद का गहरा संबंध होने के कारण पितामह ब्रह्मा ने आयुर्वेद के पठन – पाठन की परंपरा स्थापित की । ब्रह्मा जी ने इस चिकित्सा – शास्त्र को अपने मानसपुत्र दक्ष को और दक्ष ने अश्विनीकुमारों को तथा अश्विनीकुमारों ने देवराज इंद्र को पढ़ाया । इस तरह यह परंपरा आजतक चलती चली आ रही है । यद्यपि …
Read More »चिकित्सकों के चिकित्सक भगवान शिव
भगवान रुद्र ने ओषधियों का निर्माण करके जगत का इतना कल्याण किया है कि वेद ने भी भगवान शंकर सम्पूर्ण शरीर को ही भेषज मान लिया है । कहा है कि – या ते रुद्र शिवा तनू शिवा विश्वस्य भेषजी । शिवा रुद्रस्य भेषजी तया नो मृड जीवसे ।। सचमुच आयुर्वेद भगवान शिव के रूप में ही अभिव्यक्त हुआ था, …
Read More »दक्षिणा क्यों है महत्त्वपूर्ण
दक्षिणा प्रदान करने वालों के ही आकाश में तारागण के रूप में दिव्य चमकीले चित्र हैं, दक्षिणा देने वाले ही भूलोक में सूर्य की भांति चमकते हैं, दक्षिणा देने वालों को अमरत्व प्राप्त होता है और दक्षिणा देने वाले ही दीर्घायु होकर जीवित रहते हैं । शास्त्रों में दक्षिणारहित यज्ञ को निष्फल बताया गया है । जिस वेदवेत्ता ने हवन …
Read More »संस्कार क्या हैं ?
भारतीय संस्कृति में संस्कार का साधारण अर्थ किसी दोषयुक्त वस्तु को दोषरहित करना है । अर्थात् जिस प्रक्रिया से वस्तु को दोषरहित किया जाएं उसमें अतिशय का आदान कर देना ही ‘संस्कार’ है । संस्कार मन:शोधन की प्रक्रिया हैं । गौतम धर्मसूत्र के अनुसार संस्कार उसे कहते हैं, जिससे दोष हटते हैं और गुणों की वृद्धि होती है । हमारे …
Read More »
पौराणिक कथाओं, प्रेरक क्षण, मंदिरों, धर्मों, फिल्मों, हस्तियों के बारे में दिलचस्प जानकारी, हजारों गाने, भजन, आरती के बोल हैं Your wish may come true today…