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भक्त अर्जुन और श्रीकृष्ण

Abhimanu Mahabharat Mahakavye

एक बार कैलाश के शिखर पर श्री श्री गौरीशंकर भगवद्भक्तों के विषय में कुछ वार्तालाप कर रहे थे । उसी प्रसंग में जगज्जननी श्री पार्वती जी ने आशुतोष श्रीभोलेबाबा से निवेदन किया कि भगवान ! जिन भक्तों की आप इतनी महिमा वर्णन करते हैं उनमें से किसा के दर्शन कराने की कृपा कीजिए । आपके श्रीमुख से भक्तों की महिमा …

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आदर्श भक्त

aadarsh bhakt

उशीनर – पुत्र हरिभक्त महाराज शिबि बड़े ही दयालु और शरणागतवत्सल थे । एक समय राजा एक महान यज्ञ कर रहे थे । इतने में भय से कांपता हुआ एक कबूतर राजा के पास आया और उनकी गोद में छिप गया । इतने में ही उसके पीछे उड़ता हुआ एक विशाल बाज वहां आया और वह मनुष्य की सी भाषा …

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गणेश जी पर शनि की दृष्टि

Jai Ganesh Bhajan

एक बार कैलाश पर्वत पर, महायोगी सूर्यपुत्र शनैश्चर शंकरनंदन गणेश को देखने के लिए आये । उनका मुख अत्यंत नम्र था, आंखें कुछ मुंदी हुई थीं और मन एकमात्र श्रीकृष्ण में लगा हुआ था, अत: वे बाहर – भीतर श्रीकृष्ण का स्मरण कर रहे थे । वे तप: फल को खाने वाले, तेजस्वी, धधकती हुई अग्नि की शिखा के समान …

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माता, पिता एवं गुरु की महिमा

श्रीसूत जी बोले – द्विजश्रेष्ठ ! चारों वर्णों के लिए पिता ही सबसे बड़ा अपना सहायक है । पिता के समान अन्य कोई अपना बंधु नहीं है, ऐसा वेदों का कथन है । माता – पिता और गुरु – ये तीनों पथप्रदर्शक हैं, पर इनमें माता ही सर्वोपरि है । भाइयों में जो क्रमश: बड़े हैं, वे क्रम – क्रम …

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वेदमालिको भगवत्प्राप्ति

maanas se : navadha bhakti

प्राचीन काल की बात है । रैवत – मंवतर में वेदमालि नाम से प्रसिद्ध एक ब्राह्मण रहते थे, जो वेदों और वेदांगों के पारदर्शी विद्वान थे । उनके मन में संपूर्ण प्राणियों के प्रति दया भरी हुई थी । वे सदा भगवान की पूजा में लगे रहते थे, किंतु आगे चलकर वे स्त्री, पुत्र और मित्रों के लिए धनोपार्जन करने …

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आल्हा ऊदल की कथा

Bhagwan Shiv Ke liye

ऋषियों ने पूछा – सूतजी महाराज ! आपने महाराज विक्रमादित्य के इतिहास का वर्णन किया । द्वापरयुग के समान उनका शासन धर्म एवं न्यायपूर्ण था और लंबे समय तक इस पृथ्वीपर रहा । महाभाग ! उस समय भगवान श्रीकृष्ण ने अनेक लीलाएं की थीं । आप उन लीलाओं का हमलोगों से वर्णन कीजिए, क्योंकि आप सर्वज्ञ हैं । ‘भगवान नर …

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द्वादश ज्योतिर्लिंगों के अर्चा विग्रह – 2) श्री मल्लिकार्जुन

Dvadash Jyotirling

दक्षिण भारत में तमिलनाडू में पाताल गंगा कृष्णा नदी के तट पर वृपवित्र श्रीशैल पर्वत है, जिसे दक्षिण का कैलास कहा जाता है । श्रीशैल पर्वत के शिखर दर्शन मात्र से भी सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और आवागमन के चक्र से मुक्ति मिल जाती है । इसी श्रीशैल पर भगवान मल्लिकार्जुन का ज्योतिर्मय लिंग स्थित है । मंदिर …

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नवरात्र में कलश स्थापना (प्रतिपदा)

Navratre main kyo karein ghatna sathapnaain kalesh sathapna

चैत्र के नवरात्र में शक्ति की उपासना तो प्रसिद्ध ही है, साथ ही शक्तिधर की उपासना भी की जाती है । उदाहरणार्थ एक ओर देवीभागवत, कालिकापुराण, मार्कण्डेयपुराण, नवार्णमंत्र के पुरश्चरण और दुर्गापाठ की शतसहस्त्रायुतचण्डी आदि होते हैं तो दूसरी ओर श्रीमद्भागवत, अध्यात्म – रामायण, वाल्मीकीय रामायण, तुलसीकृत रामायण, राममंत्र पुरश्चरण, एक तीन पांच सात दिन की या नवाह्निक अखण्ड रामनामध्वनि …

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नवरात्र व्रत की कथा

प्राचीन काल में एक सुरथ नाम का राजा हुआ करता था । उसके राज्य पर एक बार शत्रुओं ने चढ़ाई कर दी । मंत्री गण भी राजा के साथ विश्वासघात करके शत्रु पक्ष के साथ जा मिले । मंत्जिसका परिणाम यह हुआ कि राजा परास्त हो गया, और वे दु:खी और निराश होकर तपस्वी वेष धारण करके वन में ही …

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नव वर्ष का प्रारंभ प्रतिपदा से ही क्यों?

भारतीय नववर्ष का प्रारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही माना जाता है और इसी दिन से ग्रहों, वारों, मासों और संवत्सरों का प्रारंभ गणितीय और खगोल शास्त्रीय संगणना के अनुसार माना जाता है । आज भी जनमानस से जुड़ी हुई यही शास्त्रसम्मत कालगणना व्यावहारिकता की कसौटी पर खरी उतरी है । इसे राष्ट्रीय गौरवशाली परंपरा का प्रतीक माना जाता है …

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