Breaking News

Story Katha

आंवले के वृक्ष की उत्पत्ति

Aanvale ke vrikṣ kee utpatti

पूर्वकाल में जब सारा जगत एकार्णव के जल में निमग्न हो गया था। समस्त प्राणी नष्ट हो गये थे, उस समय देवाधिदेव सनातन परमात्मा ब्रह्माजी अविनाशी परब्रह्म का जप करने लगे थे। ब्रह्मा का जप करते-करते उनके आगे श्वास निकला। साथ ही भगवान दर्शन के अनुरागवश उनके नेत्रों से जल निकल आया। प्रेम के आसुओं से परिपूर्ण वह जल की …

Read More »

भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार

Bhagavaan viṣṇau kaa matsy avataar

मत्स्य पुराण में उल्ले‍ख है कि सत्यव्रत नाम के राजा एक दिन कृतमाला नदी में जल से तर्पण कर रहे थे। उस समय उनकी अंजुलि में एक छोटी सी मछली आ गई। सत्यव्रत ने मछली को नदी में डाल दिया तो मछली ने कहा कि इस जल में बड़े जीव-जंतु मुझे खा जाएंगे। यह सुनकर राजा ने मछली को फिर …

Read More »

महाभारत का कारण

Mahaabhaarat kaa kaaraṇa

एक समय राजाधिराज युधिष्ठिर अपने भाइयों सहित श्रीकृष्ण के साथ मयदानव द्वारा बनाई सभा में स्वर्ण सिंहासन पर देवराज इन्द्र के समान विराजमान थे। मयदानव निर्मित भवन में दुर्योधन को जल-स्थल का भान नहीं हुआ और दुर्योधन गिर पड़े। इस पर भीम ने हास्य-व्यंग्य किया जिससे की दुर्योधन ने अपमानित महसूस किया। इस प्रसंग पर लोग कहते हैं कि दुर्योधन …

Read More »

कालीय नाग यमुना जी में क्यों रहता था?

Kaaleey naag yamunaa jee men kyon rahataa thaa

एक बार पक्षियों की माता विनता और सर्पों की माता कद्रू ने शर्त लगाई। विनता ने कहा कि सूर्य के रथ के घोड़े सफेद हैं और कद्रू ने कहा कि सूर्य के रथ के घोड़े काले हैं। दोनों ने सहमति की कि जो भी जीतेगी, दूसरी उसकी दासी बनकर सेवा करेगी। इस शर्त के कारण कद्रू के पुत्र सूर्य के …

Read More »

अक्षय पात्र का रहस्य

Akṣay paatr kaa rahasy

महाभारत में अक्षय पात्र संबंधित एक कथा है। जब पांचों पांडव द्रौपदी के साथ 12 वर्षों के लिए जंगल में रहने चले गए थे, तब उनकी मुलाकात कई तरह के साधु-संतों से होती थी लेकिन पांचों पांडवों सहित द्रौपदी को यही चिंता रहती थी कि वे 6 प्राणी अकेले भोजन कैसे करें और उन सैकड़ों-हजारों के लिए भोजन कहां से …

Read More »

गणेश जी को दूर्वा(दूब) क्यों चढ़ाई जाती है ?

Gaṇaesh jee

पौराणिक मान्यता के अनुसार प्राचीन काल में अनलासुर नाम का एक दैत्य था। इस दैत्य के कोप से स्वर्ग और धरती पर त्राही-त्राही मची हुई थी। अनलासुर ऋषि-मुनियों और आम लोगों को जिंदा निगल जाता था। दैत्य से त्रस्त होकर देवराज इंद्र सहित सभी देवी-देवता और प्रमुख ऋषि-मुनि महादेव से प्रार्थना करने पहुंचे। सभी ने शिवजी से प्रार्थना की कि …

Read More »

शिक्षाप्रद कहानियां – धन का मोह

dhan kaa moh

एक  नदी के किनारे एक महात्मा रहते थे। उनके पास दूर-दूर से लोग अपनी समस्याओं का समाधान पाने आते थे। एक बार एक व्यक्ति उनके पास आया और बोला- महाराज! मैं लंबे समय से ईश्वर की भक्ति कर रहा हूं, फिर भी मुझे ईश्वर के दर्शन नहीं होते। कृपया मुझे उनके दर्शन कराइए। महात्मा बोले- तुम्हें इस संसार में कौन …

Read More »

गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या की कहानी

Gautam rriṣi kee patnee ahilyaa kee kahaanee

रामायण में वर्णित कथा के अनुसार राम और लक्ष्मण ऋषि विश्वामित्र के साथ मिथिलापुरी के वन उपवन आदि देखने के लिये निकले तो उन्होंने एक उपवन में एक निर्जन स्थान देखा। राम बोले, “भगवन! यह स्थान देखने में तो आश्रम जैसा दिखाई देता है किन्तु क्या कारण है कि यहाँ कोई ऋषि या मुनि दिखाई नहीं देते?” विश्वामित्र जी ने …

Read More »

इस बार पूरे विधि-विधान से करें सोमवती अमावस्या की पूजा !

Kyo Jalate Hai Pepal Ke Peer Ke Niche Deye

सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या सोमवती अमावस्या कहलाती है। प्रत्येक मास एक अमावस्या आती है और प्रत्येक सात दिन बाद एक सोमवार। परन्तु ऐसा बहुत ही कम होता है जब अमावस्या सोमवार के दिन हो। महत्त्व पीपल के पेड़ में सभी देवों का वास होता है। अतः सोमवती अमावस्या के दिन से शुरू करके जो व्यक्ति हर अमावस्या के …

Read More »

जीवन में जरुरी है धैर्य और विनम्रता

Jeevan men jaruree hai dhairy aur vinamrataa

सिखों के तीसरे गुरु अमरदास जी के दामाद जेठाजी अत्यंत विनम्र और सहनशील व्यक्ति थे। वे गुरु अमरदास जी की बहुत सेवा करते थे। एक दिन उन्होंने जेठा जी और दूसरे दामाद रामा को एक चबूतरा बनाने के लिए कहा। दोनों ने चबूतरा बना दिया। चबूतरे को देखकर गुरुजी बोले, यह सही नहीं है। दोबारा से बनाओ। इस तरह दोबारा …

Read More »