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सिंहासन बत्तीसी की नौवीं कहानी – मधुमालती पुतली की कथा!!

madhumaalatee putalee kee katha

नवें दिन राजा भोज दरबार पहुंचे और विक्रमादित्य के सिंहासन पर बैठने लगे। इस बार उन्हें नवीं पुतली ने सिंहासन पर बैठने से रोक दिया। उसने कहा, “यहां बैठने के लिए तुम्हें राजा विक्रमादित्य जैसा होना पड़ेगा।” इतना कहकर वह विक्रमादित्य के गुणों को बताने के लिए कहानी सुनाने लगी। सालों से शासन करते हुए एक बार राजा विक्रमादित्य के …

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सिंहासन बत्तीसी की दसवीं कहानी – प्रभावती पुतली की कथा!!

prabhaavatee putalee kee katha

दसवें दिन दोबारा राजा भोज सिंहासन पर बैठने के लिए दरबार पहुंचे, तभी दसवीं पुतली प्रभावती ने सिंहासन से निकलकर उन्हें वहां बैठने से रोक दिया। प्रभावती ने कहा कि पहले आप राजा विक्रमादित्य की दयालुता की कथा सुनिए। अगर आप भी विक्रमादित्य जैसे दयालु होंगे, तो सिंहासन पर बैठ जाना। इतना कहने के बाद दसवीं पुतली राजा भोज को …

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“राजपूतों के जनहित कार्य”

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1868 ई. में भीषण अकाल पड़ा, तब मेवाड़ के महाराणा शम्भूसिंह ने उस ज़माने के लाखों रुपए खर्च करके बाहर से अनाज मंगवाया। इस अकाल में 11 लाख 63 हज़ार लोगों को उदयपुर में भोजन करवाया गया।अकाल के वक्त हैजा की बीमारी भी फैलने लगी, जिसके बाद कई लोग मरने लगे। उदयपुर में एकमात्र पिछोला झील में थोड़ा पानी शेष …

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अकबर बीरबल की कहानी: धोखेबाज काजी!!

एक बार की बात है, मुगल दरबार में बादशाह अकबर अपने दरबारियों के साथ किसी मुद्दे पर चर्चा कर रहे थे। उसी समय वहां एक किसान अपनी फरियाद लेकर आया और बोला, “महाराज न्याय करो। मुझे इंंसाफ चाहिए।” यह सुनकर बादशाह अकबर बाेले कि क्या हुआ। किसान बोला, “महाराज मैं एक गरीब किसान हूं। कुछ समय पहले मेरी पत्नी का …

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शेखचिल्ली की कहानी : बेगम के पैर!!

यह कहानी उन दिनों की है जब झज्जर शहर महेंद्रगढ़ का ही हिस्सा हुआ करता था। उस दौरान भारत के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में विदेशियों के हमले हो रहे थे। पानीपत, रोहतक और दिल्ली जैसे शहरों पर खतरा ज्यादा था। उन दिनों नवाब झज्जर में मौजूद बुआवाल तालाब की मरम्मत करवा रहे थे, ताकि मुसीबत के समय रेवाड़ी के लोगों को …

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बोलने वाली गुफ़ा!!

एक जंगल में खरनखर नामक शेर रहता था. एक दिन वह शिकार की तलाश में बहुत दूर निकल गया. शाम हो चुकी थी. कोई शिकार हाथ नहीं लगा था. ऊपर से वह थक कर चूर हो चुका था. तभी उसे एक गुफ़ा दिखाई पड़ी. वह गुफ़ा के अंदर चला गया. गुफ़ा खाली थी. शेर ने सोचा – अवश्य यहाँ रहने …

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अंधा गिद्ध और दुष्ट बिल्ली की कहानी : हितोपदेश!!

गोदावरी नदी के तट पर सेमल का एक विशाल वृक्ष था. उस वृक्ष पर कई पक्षी निवास करते थे. दिन में वे भोजन की तलाश में खेत-खलिहानों में जाया करते और संध्याकाल को पेड़ पर स्थित अपने-अपने घोंसलों में लौट आते. यही उनकी दिनचर्या थी. एक दिन जरद्गव नामक एक अंधा गिद्ध (Blind vulture) वहाँ आया. वह वृद्ध हो चला …

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शेर और घमंडी बारहसिंगा की कहानी!!

एक जंगल में एक बारहसिंगा  रहता था. उसके बारह सींग थे, जो बहुत सुंदर थे. मगर पैर पतले और भद्दे थे. उसे अपने सींगों पर बड़ा घमंड था. जब भी वह नदी पर पानी पीने  जाता, तो नदी के स्वच्छ और शांत जल में अपने सुंदर सींगों को देखकर बहुत खुश होता. किंतु अपने पैरों को देखकर दु;खी हो जाता.  वह …

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पैसा और परिवार!!

रमेश का एक छोटा सा परिवार था, जिसमें एक ख़ूबसूरत पत्नि और दो प्यारे बच्चे थे. उसकी पत्नि और बच्चे हर हाल में ख़ुश थे. लेकिन रमेश उन्हें ज़िंदगी के सारे ऐशो-आराम देना चाहता था और इसके लिए वह प्रतिदिन १६ घंटे से भी अधिक काम किया करता था. दिनभर ऑफिस में काम करने के साथ-साथ वह सुबह और शाम …

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पतंग और डोरी !!

एक बार एक व्यक्ति अपने बेटे के साथ पतंग उत्सव में गया. वहाँ लोग रंग-बिरंगी पतंगें उड़ा रहे थे. आसमान में उड़ती रंग-बिरंगी पतंगों को देख बेटा भी पतंग उड़ाने मचल उठा. उसने अपने पिता से कहा, “पापा, मैं भी पतंग उड़ाना चाहता हूँ. प्लीज मेरे लिए एक पतंग ख़रीद दीजिये.” बेटे की इच्छा पूरी करने पिता पास ही की …

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