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अधिकार सबका है बराबर

फूल पर हँसकर अटक तो, शूल को रोकर झटक मत, ओ पथिक ! तुझ पर यहाँ अधिकार सबका है बराबर ! बाग़ है ये, हर तरह की वायु का इसमें गमन है, एक मलयज की वधू तो एक आँधी की बहन है, यह नहीं मुमकिन कि मधुऋतु देख तू पतझर न देखे, कीमती कितनी कि चादर हो पड़ी सब पर …

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रिश्तों का सम्मान

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ओहो रामू तीन दिनों से समझा रही हूं तुझे कि वो एसी वाला कमरा राजन बाबू के लिए तैयार करना है ये नई वाली चादरें भी उसी कमरे के लिए निकाली थी मैने... तूने यहां इस कमरे में क्यों बिछा दीं..सुमित्रा जी रामू पर बिगड़ रही थीं।

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पुरुषोतम मास /अधिक मास माहात्म्य अध्याय– 11

पुरुषोतम मास /अधिक मास माहात्म्य अध्याय– 11

नारदजी बोले:- सब मुनियों को भी जो दुष्कर कर्म है ऐसा बड़ा भारी तप जो इस कुमारी ने किया वह हे महामुने! हमसे सुनाइये ॥ श्रीनारायण बोले अनन्तर ऋषि-कन्या ने भगवान्‌ शिव, शान्त, पंचमुख, सनातन महादेव को चिन्तन करके परम दारुण तप आरम्भ किया ॥ सर्पों का आभूषण पहिने, देव, नन्दी-भृंगी आदि गणों से सेबित, चौबीस तत्त्वों और तीनों गुणों …

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पुरुषोतम मास /अधिक मास माहात्म्य अध्याय– 10

पुरुषोतम मास /अधिक मास माहात्म्य अध्याय– 10

दुर्वासा ऋषि बोले,:- हे सुन्दरि! गुप्त से भी गुप्त उपाय मैं तुझसे कहता हूँ। यह विषय किसी से भी कहने योग्य नहीं है, तथापि तेरे लिये तो मैंने ये विचार ही लिया है। मैं विस्तार पूर्वक न कहकर तुझसे संक्षेप में कहता हूँ। हे सुभगे! इस मास से तीसरा मास जो आवेगा वह पुरुषोत्तम मास है। इस मास में तीर्थ …

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पुरुषोतम मास /अधिक मास माहात्म्य अध्याय– 9

पुरुषोतम मास /अधिक मास माहात्म्य अध्याय– 9

श्रीनारायण बोले :- अपने पिता को स्मरण करते-करते और बराबर शोक करते-करते उस घर में कुछ काल उस कन्या का व्यतीत हुआ ॥ ३ ॥ सिंह से भागती हिरणी की तरह घबड़ाई हुई, सुने घर में रहनेवाली, दुःखरूप अग्नि से उठी हुई भाप द्वारा बहते हुए अश्रुनेत्र वाली, जलते हुए हृत्‍कमल वाली, दुःख से प्रतिक्षण गरम श्‍वास लेनेवाली, अतिदीना, घिरी हुई …

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कहानी एक बूढ़ी लाचार उदास माँ की

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एक आलीशान से बँगले के बड़े से लिविंग रूम मेंवाल पेंटिंग के जैसे शानदार स्मार्ट टी वी दीवार पर टंगा हैऔर लाइव आ रहा है आई पी ऐल का फाइनलरोमांच है कि हर गेंद के साथ बस बढ़ता ही चला जा रहा हैलिपे पुते चेहरों पर तनाव है ख़िझ है और है ग़ुस्सा सा भीतो है कभी कभार राहत भी …

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सुकरात का पत्नी प्रेम

सुकरात जैसे महापुरुष की पत्नी भी सुकरात से नाखुश थी, बहुत नाखुश थी क्यों? क्योंकि वह दार्शनिक ऊहापोह में ऐसा लीन हो जाता था कि भूल ही जाता था कि पत्नी भी है।एक दिन तो दार्शनिक चर्चा में ऐसा लीन था कि चाय ही पीना भूल गया सुबह की। पत्नी को तो ऐसा क्रोध आया, चाय बनाकर बैठी है और …

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पिता का प्रेम..

ट्रेन में समय गुजारने के लिए बगल में बैठे बुजुर्ग से बात करना शुरु किया मेरी पत्नी नीति नें ” आप कहाँ तक जाएंगे दादा जी “” इलाहाबाद तक । ” बुजुर्ग ने जवाब दिया.उसने (पत्नी) ने मजाक में कहा ” कुंभ लगने में तो अभी बहुत टाइम है बाबा। “” वहीं तट पर बेठकर इंतजार करेंगे कुंभ का ,बेटी …

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यही सूत्र है परमात्मा तक जाने का।

यही सूत्र है परमात्मा तक जाने का। मैंने सुना है, एक सम्राट अपने वजीर से नाराज हो गया। और उसने वजीर को एक बहुत ऊंचे मीनार पर कैद करवा दिया। उस मीनार से कूदने के सिवाय और कोई बचने का उपाय न था। लेकिन कूदना मरना था। मीनार बड़ी ऊंची थी। उससे कूदे तो मरे। कोई हथकड़ियां नहीं डाली थीं।वजीर …

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