‘चले मग जात सूखि गए गात’–(गोस्वामी तुलसीदास)उनका शरीर सूख गया अमर होने के कारण मर सकते नहीं। अतः रावण को गाली देते हुए और कष्ट के कारण अपनी अमरता को कोसते हुए अभी भी जा रहे हैं। इधर हनुमान जी ने आकर प्रभु के चरणों में शीश झुकाया।श्रीराम बोले–’क्या हुआ हनुमान ?’‘प्रभु ! उन्हें ऊपर भेजकर आ रहा हूँ।’राघव–’पर वे …
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पूज्य श्री गोस्वामी तुलसीदास
1966 में हनुमान गढ़ी में लिखी गईं श्री हनुमान चालीसा जो की शुद्ध रूप से वैसी ही है जैसी पूज्य गुरुदेव ने संपादित की है… पूज्य गुरुदेव की ये..
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