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Tag Archives: जयशंकर प्रसाद

अहंकार की दुर्गंध

There were three children. He used to have special reverence in religion.

संत तुलसीदासजी ने लिखा है, ‘प्रभुता पाई काहि मद नाहीं’ अर्थात् किसी भी तरह से धन, पद, सत्ता या विद्या पाते ही आदमी के अंदर अभिमान पैदा हो जाता है कि वह सबसे बड़ा है।

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