एक बार विवेकानंद जी एक ट्रेन में सफर कर रहे थे । सन्यासी वेश था । मुख पर तेज था । हट्टे कट्टे थे । जवान थे । उनके सामने वाली सीट पर दो पढ़े लिखे युवक थे और आपस में इंग्लिश में बात कर रहे थे कि ऐसे ही जवान लोगों ने हमारे देश का सत्यानाश किया हुआ हैभगवे …
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गुरु की महिमा – Guru ki mahima!!
मूलशंकर बेहद ही गरीब परिवार में पले – बढ़े उनका पालन – पोषण अभावग्रस्त रहा गुरुकुल में किसी प्रकार दाखिला मिला मूला शंकर पढ़ने में बड़े ही मेधावी छात्र थे। वह अन्य छात्रों से अलग विचार रखते थे और पढ़ने तथा समाज के बारे में वह विशेष अध्ययन किया करते थे। शिक्षा गुरुकुल स्तर से जब पूर्ण हुई सभी शिष्य …
Read More »सेवा-परोपकार सर्वोपरि
भारतीय संस्कृति मानवता और सहिष्णुता का संदेश देती रही है । कहा गया है, ‘एक सत् विप्रा बहुधा वदंति’ यानी उपासना के सभी मार्ग अंततः चरम सत्य तक ही पहुँचाते हैं। आयरलैंड में जन्मी मार्गरेट नोबल नामक युवती ने स्वामी विवेकानंद के उपदेशों से प्रभावित होकर अपना सर्वस्व भारत व भारतीय संस्कृति की सेवा के लिए समर्पित कर दिया था। …
Read More »बिन लक्ष्य जीवन जैसे बिन पता पत्र
स्वामी विवेकानंद के गुरु का नाम रामकृष्ण परमहंस थ। रामकृष्ण परमहंस जी एक उच्च कोटि के विचारक थे। उन्होंने अपने प्रेरणादायक विचारों से समाज कल्याण में बहुत योगदान दिया। उनके जीवन के बहुत सारे प्रसंग चर्चित है। उनमें सुखी और सफल जीवन के सूत्र छिपे हुए हैं। जिनमे से एक हम आपके सामने परमहंस जी के बताये हुए कुछ अनमोल …
Read More »धर्म की निंदा होने पर दिया उचित तर्क
बात उस समय की है जब स्वामी विवेकानंद पूना (वर्तमान में पुणे) गए हुए होते थे। वह रेलगाड़ी से वहां जा रहे थे। तभी वहां कुछ शिक्षित लोगों ने अंग्रेजी भाषा में सन्यासियों की निंदा करना शुरू कर दी। उन्हें लगा कि स्वामी जी को अंग्रेजी भाषा का ज्ञान ने होने के चलते वह नहीं समझ पाएंगे। चर्चा जब रुकने …
Read More »दो पैसे के काम के लिए तीस साल की बलि!
स्वामी विवेकानंद एक बार कहीं जा रहे थे। रास्ते में नदी पड़ी तो वे वहीं रुक गए क्योंकि नदी पार कराने वाली नाव कहीं गई हुई थी। स्वामीजी बैठकर राह देखने लगे कि उधर से नाव लौटे तो नदी पार की जाए। एका-एक वहां एक महात्मा भी आ पहुंचे। स्वामीजी ने अपना परिचय देते हुए उनका परिचय लिया। बातों ही …
Read More »इसीलिए कहते हैं मां होती है दुनिया में महान
एक बार एक जिज्ञासु व्यक्ति ने स्वामी विवेकानंद से पूछा, ‘संसार में मां की महानता क्यों गाई जाती है?’ स्वामीजी ने मुस्कुराते हुए कहा, पांच सेर का एक पत्थर ले आओ। जब वह व्यक्ति पत्थर ले आया, तो स्वामीजी ने उससे कहा, ‘इसे कपड़े से लपेट कर पेट पर बांध लो और चौबीस घंटे बाद मेरे पास आना।’ उस व्यक्ति …
Read More »स्वामी विवेकानंद के जीवन के 3 प्रेरक प्रसंग
लक्ष्य पर ध्यान लगाओ स्वामी विवेकानंद अमेरिका में भ्रमण कर रहे थे . एक जगह से गुजरते हुए उन्होंने पुल पर खड़े कुछ लड़कों को नदी में तैर रहे अंडे के छिलकों पर बन्दूक से निशाना लगाते देखा . किसी भी लड़के का एक भी निशाना सही नहीं लग रहा था . तब उन्होंने ने एक लड़के से बन्दूक ली और …
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