अखियाँ निष् दिन बेहती जाएइक पल चैन न पाए श्याम बिनदेखे बिना गबराए,निष् दिन बेहती जाए दामनी की दमकन से छीन छीन विरहा गाज गिराए,घन की गर्जन सुन व्याकुल व्रिग सा वन ऋतू आयेनिष् दिन बेहती जाए गिन गिन तारे गई आवनी जब से नैन मिलायेनिर्मोही सु नेहा लगा कर क्यों मुझको तडपायेनिष् दिन बेहती जाए राह तकत अखियाँ पथराई …
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