हिंदू नवसंवत्सर यानी चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को हम कई नामों से जानते हैं। महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा तो दक्षिण भारत में उगादि (युगादि) के रुप में नये साल का स्वागत करते हैं । उगादि को युगादि, इसलिए भी कहते हैं क्योंकि यह युग+आदि से मिलकर बना है । युगादि का अर्थ युग का प्रारंभ होता है । उगादि …
Read More »vikkykyt@yahoo.com
मुक्ति के लिये साधन की आवश्यकता
भगवान सर्वज्ञ हैं, सब कुछ जानते हैं, परंतु किसकी मुक्ति होगी इसको भगवान भी पहले से नहीं जानते हैं, यदि पहले से ही जान जाएं तो प्रयत्न की क्या आवश्यकता है ? भगवान तो जानते हैं फिर प्रयत्न क्या हो ? यह बात नहीं कि भगवान जान नहीं सकते, जीवों को अवसर दिया है, यदि भगवान निश्चित कर दें कि …
Read More »आदिगुरु श्रीकृष्ण
वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् । देवकीपरमानंद कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ।।यह संसार एक बहुत बड़ी पाठशाला है । इसमें अगणित जीव शिक्षा ग्रहण करने के लिये आते हैं, और यथाधिकार निर्दिष्ट काल तक शिक्षा – लाभ कर चले जाते हैं, और फिर कुछ विश्राम के पश्चात् पुन: नये वेशभूषा के साथ इसमें आकर प्रवेश करते हैं । कहने का आशय यह है …
Read More »भगवान की न्यायकारिता एवं दयालुता
भगवान दयालु हैं या न्यायकारी हैं । हम तो यह मानते हैं कि वे दयालु भी हैं, न्यायकारी भी हैं । दो बात एक जगह कैसे रह सकती है ? मनुष्य में भी रह सकती है, फिर भगवान में रहनी कौन कठिन बात है । जब न्याय ही करते हैं, कर्मों के अनुसार ही फल देते हैं तब दया क्या …
Read More »सौरधर्म का वर्णन
राजा शतानीक ने पूछा – मुने ! भगवान सूर्य का माहात्म्य कीर्तिवर्धक और सभी पापों का नाशक है । मैंने भगवान सूर्यनारायण के समान लोक में किसी अन्य देवता को नहीं देखा । जो बरण – पोषम और संहार भी करनेवाले हैं वे भगवान सूर्य किस प्रकार प्रसन्न होते हैं, उस धर्म को आप अच्छी तरह जानते हैं । मैंने …
Read More »जाने संन्यास और गृहस्थ क्या है श्रेष्ठ ?
एक राजा था । उसके राज्य में जब कभी कोई संन्यासी आते, तो उनसे वह सदैव एक प्रश्न पूछा करता था – ‘संसार का त्याग कर जो संन्यास ग्रहण करता है, वह श्रेष्ठ है, या संसार में रहकर जो गृहस्थ के समस्त कर्तव्यों को करता जाता है, वह श्रेष्ठ है ?’ अनेक विद्वान लोगों ने उसके इस प्रश्न का उत्तर …
Read More »श्रीदुर्गासप्तशती के आदिचरित्र का माहात्म्य
ऋषियों ने पूछा – सूतजी महाराज ! अब आप हमलोगों को यह बतलाने की कृपा करें कि किस स्तोत्र के पाठ करने से वेदों के पाठ करने का फल प्राप्त होता है और पाप विनष्ट होते हैं । सूतजी बोले – ऋषियों ! इस विषय में आप एक कथा सुनें । राजा विक्रमादित्य के राज्य में एक ब्राह्मण रहता था …
Read More »अपना जीवन सेवा के लिए है
दूसरे की आत्मा को सुख पहुंचाने के समान कोई धर्म नहीं है – पर हित सरिस धर्म नहिं भाई । पर पीड़ा सम नहिं अधमाई ।। भगवान अन्न और वस्त्र सबके लिये आवश्यकता के अनुसार भेजते हैं । इसलिए जिसके पास जो चीज अधिक हो वह जिसके पास उसका अभाव हो उसे दे दे । परहित बस जिन्ह के मन …
Read More »सुदामा की कथा
सुदामा एक अत्यंत दीन ब्राह्मण थे । बालकपन में उसी गुरु के पास विद्याध्ययन करने गये थे जहां भगवान श्रीकृष्ण चंद्र अपने जेठे भाई बलराम जी के साथ शिक्षा ग्रहण करने के लिए गये थे । वहां श्रीकृष्ण चंद्र के साथ इनका खूब संग रहा । इन्होंने गुरुजी की बड़ी सेवा की । गुरुपत्नी की आज्ञा से एक बार सुदामा …
Read More »भक्त हनुमान
हनुमान जी महाराज भगवान के परम भक्त थे । उनमें तीन बात विशेष थी – 1. भगवान के चरणों में रहते थे । भगवान को छोड़कर एक क्षण भी अलग नहीं होना चाहते थे । जब भगवान की आज्ञा होती थी, तभी भगवान की आज्ञा पालन के लिये चरणों से अलग होते थे । 2. जब भगवान की आज्ञा हो …
Read More »
पौराणिक कथाओं, प्रेरक क्षण, मंदिरों, धर्मों, फिल्मों, हस्तियों के बारे में दिलचस्प जानकारी, हजारों गाने, भजन, आरती के बोल हैं Your wish may come true today…