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vikkykyt@yahoo.com

महात्मा बुद्घ का सत्संग

एक बार किसी गांव में महात्मा बुद्घ का सत्संग हुआ। सब इस होड़ में लग गए कि क्या भेंट करें?सुदास नाम का एक मोची था। उसने देखा कि मेरे घर के बाहर के तालाब में एक कमल खिला है। उसकी इच्छा हुई कि आज नगर में महात्मा बुद्घ आए हैं। सब लोग तो उधर ही गए हैं, तो आज यह …

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” बढ़ी हुई दाढ़ी.. “

बढ़ी औऱ बेतरतीब दाढ़ी वाले किसी व्यक्ति को देख कर यह अन्दाज़ा लगाना बहुत ग़लत नहीं है कि अगर वह व्यक्ति बहुत ग़रीब नहीं है तो फ़िर वह ख़ुद के प्रति लापरवाह है या अच्छा दिखने में इसकी क़ोई रुचि नहीं है ।लेकिन वैज्ञानिकों की माने तो ऐसे व्यक्ति के बारे में राय थोड़ी कम नकारात्मक बनेगी ।उनका कहना है …

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यमराज और डाकू

एक साधु व डाकू यमलोक पहुंचे। डाकू ने यमराज से दंड मांगा और साधु ने स्वर्ग की सुख-सुविधाएं। यमराज ने डाकू को साधु की सेवा करने का दंड दिया। साधु तैयार नहीं हुआ। यम ने साधु से कहा- तुम्हारा तप अभी अधूरा है।मृत्यु के बाद एक साधु और एक डाकू साथ-साथ यमराज के दरबार में पहुंचे। यमराज ने अपने बहीखातों …

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किवाड़ की खुली सांकल

बचपन में हम देखते थे कि घर के पुरुषों के बाहर जाने पर घर की महिलाएं कभी किवाड़ तुरंत बन्द नहीं करती थी, सांकल खुली छोड़ देती थीं।कभी कभी पुरुष कुछ दूर जाकर लौट आते थे, ये कहते हुए कि कुछ भूल गया हूं और मुस्कुरा देते थे दोनों एक दूसरे को देखकर।एक बार बच्चे ने अपनी मां से पूछ …

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महापंडित राहुल सांकृत्यायन का 130 वां जन्मदिन

कल महापंडित राहुल सांकृत्यायन का 130 वां जन्मदिन था…हम उन्हें महा पंडित भले ही कहें पर उनकी विद्वत्ता के कायल इस देश के विश्व विद्यालयों के अलावा पूरी दुनिया के शैक्षणिक संस्थान थे।इतिहास,पुरातत्व और दर्शन को हिंदी में जानने के लिए उनकी किताबें पहली सीढ़ी का काम करती हैं,मैं भी उनकी किताबों के माध्यम से दुनिया से परिचित हुआ था।पर …

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अपने शहर की अपनेपन की मिठास है

मैं तो सुबह से घूम -घूम कर थक गई हूं और कितना घूमना है।रानी ने कहा।अरे, अभी से थक गई हो ये तो कुछ भी नहीं है। ऐसे थकोगी तो बड़े बड़े किलों को कैसे देखोगी।ऐतिहासिक स्थलों को देखने के लिए बहुत चलना पड़ता है और सीढ़ियां भी चढ़नी पड़ती हैं।श्याम ने कहा।फिर भी घूमते हुए बहुत समय हो गया …

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आत्मविश्वास कभी न खोना,

जब डायरेक्टर के दफ्तर के बाहर रोके गए देव आनंद, वॉचमैन ने पूछने शुरू कर दिए थे सवालदेवानंद 21 साल की उम्र में बंबई आए थे और अपने कॉन्फिडेंस के बलबूते फिल्म प्रोड्यूसर को इंप्रेस कर डाला था। देव आनंद की छवि देख कर उस वक्त वह फिल्म प्रोड्यूसर भी उन्हें देखता रह गया था।देव आनंद ने फिल्म ‘हम एक …

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माता पिता के चरणों में स्वर्ग है

आजकल के लड़के नौकरी लगने के तुरंत बाद शादी करके दुलहन को सीधे नौकरी पर ले जाते हैं तथा सारा पढ़ाई का कर्ज , खेती का काम सब झंझट माता पिता के पास छोड़ जाते हैं ।वो सबसे पहले शहर में प्लाट लेने की सोचते हैं तथा माता पिता की ओर कम ध्यान देते हैं जो बहुत दुखदाई है ।फेसबुक …

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ज्योतिर्लिंग के दर्शनों की इच्छा दादी के मन समाई

निलीमा मैडम ,आपने इस स्टूडेंट को गलत तरीके से ज्यादा नंबर देकर पास करने की कोशिश की है , इसका आप क्या स्पष्टीकरण देना चाहती है ?वार्षिक परीक्षा की कापिया जाँची जा रही थी और उनमे से कुछ कापिया उस स्कुल के प्रिन्सिपाल ने क्रॉस चेक करने के हिसाब से अपने पास बुलवाई।उनमे से एक कॉपी में निलीमा मैडम ने …

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महात्मा बुद्ध का शिष्य चंदौसा

एक समय की बात है महात्मा बुद्ध अपने शिष्यों के साथ मगध आए हुए थे। वहां एक चंदौसा नाम का मोची गांव के बाहर अपनी कुटिया बनाकर रहता था। उसके परिवार में उसकी पत्नी और 4 बच्चे रहा करते थे। चंदौसा की कुटिया के बाहर एक बड़ा सा तालाब था, जिसमें बरसात का पानी जमा हुआ करता था। चंदौसा सवेरे …

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