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नाजुक चूजा !!

एक बार की बात है, एक नाजुक चूजा जंगल में सैर के लिए निकला। वह देवदार के पेड़ के नीचे से जा रहा था तभी अचानक एक फल उसके सिर पर आ गिरा। नाजुक चूजे ने समझा कि हो न हो आसमान गिर रहा है। भयभीत होकर वह दौड़ने लगा। उसने जंगल के राजा शेर को यह बताने का निर्णय …

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चींटी और टिड्डा !!

गर्मियों के दिन थे। एक मैदान में एक टिड्डा अपनी ही मस्ती में झूम-झूम कर गाना गा रहा था। तभी उधर से एक चींटी गुजरी। वह एक मक्के का दाना उठाकर अपने घर ले जा रही थी। टिड्डे ने उसे बुलाया और कहा, “चींटी रानी, चींटी रानी, कहाँ जा रही होघ? इतना अच्छा मौसम है… आओ बातें करें… मस्ती करें…” …

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शब्दों का जादू !!

सेठ अनाथपिंडक भगवान् बुद्ध के परम स्नेहभाजन थे। वे अपने मन की तमाम बातें और वेदना निःसंकोच उनके समक्ष प्रस्तुत कर समाधान पाने की आशा रखते थे। एक दिन अनाथपिंडक का उदास चेहरा देखकर तथागत ने उनसे पूछा, ‘सेठ, किस समस्या के कारण चिंतित हो?’ उन्होंने बताया, ‘नई बहू सुजाता के व्यवहार के कारण बहुत परेशान हूँ। वह अत्यंत अभिमानी …

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अनूठी सेवा भावना !!

गीता मर्मज्ञ सद्गृहस्थ संत जयदयाल गोयंदका ने आजीवन गीता का प्रचार करने का संकल्प लिया था। इसी उद्देश्य से गीता प्रेस गोरखपुर ) की स्थापना की गई थी। उन्होंने स्वयं भी अनेक धार्मिक ग्रंथों की रचना की । वे प्रायः कहा करते थे, ‘पीड़ितों की सेवा सबसे बड़ा धर्म है। जिसका हृदय दूसरे के दुःख को देखकर द्रवित नहीं होता, …

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करुणा और प्रेम !!

दक्षिण भारत के एक नगर में तिरुविशनल्लूर अय्यावय्यर नामक एक निश्छल हृदय के विद्वान् ब्राह्मण रहते थे। उन्होंने धर्मशास्त्रों का अध्ययन कर यह निष्कर्ष निकाला कि करुणा और प्रेम ही धर्म का सार है। एक बार उनके पिता के श्राद्ध का दिन था। ब्रह्मभोज की तैयारी हो रही थी। श्राद्ध के अवसर पर ब्राह्मण को जो भोजन दिया जाता है, …

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प्राणी में परमात्मा !!

एक दिन महर्षि सनतकुमार और देवर्षि नारद सत्संग कर रहे थे। सनतकुमार ने प्रश्न किया, ‘देवर्षि, आपने किन-किन शास्त्रों और विद्याओं का अध्ययन किया है?’ नारदजी ने उन्हें बताया कि उन्होंने वेदों, पुराणों, वाकोवाक्य (तर्कशास्त्र), देवविद्या, ब्रह्मविद्या, नक्षत्र विद्या आदि का अध्ययन किया है, पर उनका ज्ञान मात्र पुस्तकीय है। नारदजी ने विनयपूर्वक महर्षि से ब्रह्मविद्या का ज्ञान कराने की …

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वैज्ञानिक की ईश्वरनिष्ठा !!

संसार के अग्रणी वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टीन को वर्ष 1921 में भौतिकी के नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वह जीवन के अंतिम समय तक नई-नई खोजों में तो लगे ही रहे, ईश्वर के प्रति भी उनकी अटूट निष्ठा बनी रही। एक बार आइंस्टीन बर्लिन हवाई अड्डे से विमान में सवार हुए। वायुयान जब ऊपर पहुँचा, तो उन्होंने अपनी जेब …

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सद्बुद्धि-सद्भावना !!

एक सेठ अत्यंत धर्मात्मा थे। वे अपनी आय का बहुत बड़ा हिस्सा सेवा परोपकार जैसे धार्मिक कार्यों में खर्च किया करते थे कई पीढ़ियों से उनके परिवार पर लक्ष्मी की असीम कृपा बनी रहती थी। एक बार देवी लक्ष्मी के मन में आया कि एक जगह रहते-रहते कई सौ वर्ष हो गए, ऐसे में, क्यों न इस परिवार को त्यागकर …

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अनूठी सहृदयता !!

जवाहरलाल नेहरू अपने परिचितों के दुःख-दर्द के बारे में सुनकर द्रवित हो उठते थे। एक बार नेहरूजी कांग्रेस के अधिवेशन में भाग लेने लखनऊ पहुँचे। वहाँ पहुँचकर उन्हें पता लगा कि लालबहादुर शास्त्रीजी की बेटी चेचक से पीड़ित थी और आर्थिक वजहों से समुचित इलाज न हो पाने के कारण उसकी मृत्यु हो गई । शास्त्रीजी उन दिनों लखनऊ में …

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अहंकार त्यागो !!

राजगृह के राजकीय कोषाध्यक्ष की पुत्री भद्रा बचपन से ही प्रतिभाशाली थी। उसने माता-पिता की इच्छा के विरुद्ध एक युवक से विवाह कर लिया। विवाह के बाद उसे पता चला कि वह दुर्व्यसनी और अपराधी किस्म का है। एक दिन युवक ने भद्रा के तमाम आभूषण कब्जे में ले लिए और उसकी हत्या का प्रयास किया, पर भद्रा ने युक्तिपूर्वक …

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