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प्याऊ!!
आसमान से आग बरस रही थी ऐसे में अधिकांश लोग घरों में रहने को मजबूर थे सुबह तकरीबन ग्यारह बजे जब रमेश ने दरवाजा खोला तो फिर से उसके घर के बाहर वहीं बुजुर्ग महिला अपनी रेहड़ी लगाएं खड़ी थी तू फिर यहां …. मना किया था ना पता नहीं कब सुधरेंगे ये लोग चल सका यहां से अपना बोरिया …
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wish4me Your wish may come true today…