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Career Guide

बिम्बिसार

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मात्र 40 करोड़ के बजट में बनी यह तेलगु फ़िल्म वर्ष 2022 में बिना किसी बड़े नाम के रिलीज़ हुई थी,बावजूद इसके मूवी ने बॉक्स ऑफिस पर काफी अच्छा प्रदर्शन किया था।

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स्त्रियों को समर्पित

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मुझे याद नहीं कि बचपन में कभी सिर्फ इस वजह से स्‍कूल में देर तक रुकी रही होऊं कि बाहर बारिश हो रही है ना। भीगते हुए ही घर पहुंच जाती थी

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बाढ राहत

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राशन नहीं मिला क्या" साइकिल से गैस सिलेंडर उतार रहे अपने पति राम सिंगार से उनकी पत्नी पार्वती ने पूछा। मिला है। तो कहाँ रख आये, आ ई सिलेंडर कहाँ से भरवा लाये?

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मुझे जाने दो

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कृपया बिना रोए पढ़ें। यह मैंसेज मेरे दिल को छू गया है।* *अगर पत्नी है तो दुनिया में सब कुछ है। राजा की तरह जीने और आज दुनिया में अपना सिर ऊंचा रखने के लिए अपनी पत्नी का शुक्रिया कीजिए। आपकी सुविधा – असुविधा, आपके बिना कारण के क्रोध को संभालती है। तुम्हारे सुख से सुखी है और तुम्हारे दुःख …

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गंगा नदी

गंगा जयंती हिन्दुओं का एक प्रमुख पर्व है | वैशाख शुक्ल सप्तमी के पावन दिन गंगा जी की उत्पत्ति हुई इस कारण इस पवित्र तिथि को गंगा जयंती के रूप में मनाया जाता है | गंगा जयंती के शुभ अवसर पर गंगा जी में स्नान करने से सात्त्विकता और पुण्यलाभ प्राप्त होता है | वैशाख शुक्ल सप्तमी का दिन संपूर्ण …

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मैं कौन हूँ

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उसने सोचा कि यह व्यक्ति बहुत अमीर लगता है, इससे भीख़ माँगने पर यह मुझे जरूर अच्छे पैसे देगा। वह उस सेठ से भीख़ माँगने लगा।*भिख़ारी को देखकर उस सेठ ने कहा, “तुम हमेशा मांगते ही हो, क्या कभी किसी को कुछ देते भी हो?”भिख़ारी बोला, “साहब मैं तो भिख़ारी हूँ, हमेशा लोगों से मांगता ही रहता हूँ, मेरी इतनी …

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विवेकानंद जी एक ट्रेन में सफर

एक बार विवेकानंद जी एक ट्रेन में सफर कर रहे थे । सन्यासी वेश था । मुख पर तेज था । हट्टे कट्टे थे । जवान थे । उनके सामने वाली सीट पर दो पढ़े लिखे युवक थे और आपस में इंग्लिश में बात कर रहे थे कि ऐसे ही जवान लोगों ने हमारे देश का सत्यानाश किया हुआ हैभगवे …

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गर्मी की छुट्टियां

सुनो जी, मैं मायके चली जाऊँ? गर्मी की छुट्टियां शुरु हो गईं हैं… पापा की तबियत भी कुछ खराब है और उनकी याद भी बहुत आ रही है मिल भी आऊँगी।'

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सदा सत्य ही बोले

एक दिन एक भुड़सवार अपने गुस्सैल घोड़े को बेचने के लिए बाजार ले जा रहा था। चलते चलते उसे भूख लगी और वो खाना खाने के लिए एक बाग़ में रुक गया। उसने एक पेड़ से घोड़े को बांध दिया। घोडा पेड़ के नीचे लगी घास को खाने लगा और वो घुड़सवार भी खाना खाने लगा। तभी एक व्यक्ति अपने …

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आलस जीवन के लिए अभिशाप है

एक बार की बात है एक शिष्य अपने गुरु का बहुत आदर-सम्मान किया करता था | गुरु भी अपने इस शिष्य से बहुत स्नेह करते थे लेकिन वह शिष्य अपने अध्ययन के प्रति आलसी और स्वभाव से दीर्घसूत्री था | सदा स्वाध्याय से दूर भागने की कोशिश करता तथा आज के काम को कल के लिए छोड़ दिया करता था …

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