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विंस्टन चर्चिल की कामयाबी का ये था अचूक फार्मूला

विंस्टन चर्चिल की कामयाबी का ये था अचूक फार्मूला

विंस्‍टन चर्चिल, अंग्रेज राजनीतिज्ञ थे। वे द्वितीय विश्वयुद्ध, 1940-1945 के समय इंग्लैंड के प्रधानमंत्री थे। राजनीतिज्ञ के रूप में उन्होंने कई पदों पर कार्य किया। विश्वयुद्ध से पहले वे गृहमंत्रालय में व्यापार बोर्ड के अध्यक्ष रहे। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान वे लॉर्ड ऑफ एडमिरिल्टी बने रहे। युद्ध के बाद उन्हें शस्त्र भंडार का मंत्री बनाया गया। 10 मई 1940 …

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जब पीरों को बताया, ‘संत कौन होते हैं?’

  एक बार सिखों के प्रथम गुरु गुरु नानक देव जी मुलतान की यात्रा पर गए। जब मुलतान पहुंचे तो पीरों के बाबा ने दूध से भरा कटोरा भेजा। यह एक तरह का संदेश था कि मुलतान में बहुत से पीर हैं। वह यहां नहीं रहें। लेकिन बदले में गुरु नानक जी ने उनको बगली का फूल भिजवाया। इसका अर्थ …

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एक बॉस की कहानी लेकिन उसने क्यों कहा, ‘कल उत्तर दूंगा’

एक कंपनी का बॉस यात्रा के दौरान गांव से गुजरा । कुछ लोगों ने उन्हें अपशब्द कहने के साथ अभद्र व्यवहार करना शुरु कर दिया। इस पर बॉस ने कहा, मैं कल आकर उत्तर दूंगा। लोग बहुत हैरान हुए। फकीर से उन्‍होंने कहा, ‘हमने तुम्हारा अपमान किया है, तुम्हारे बारे में अभद्र बातें कहीं । तुम हमसे झगड़ने की बजाए …

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ऐसे बनाएं जिंदगी को ओर बेहतर

सदानंद स्वामी श्रद्धानंद के शिष्य थे। उन्होंने काफी मेहनत से ज्ञान प्राप्त किया था। लेकिन उन्हें अपने ज्ञान पर अहंकार हो गया। यह उनके व्यवहार में भी दिखाई देने लगा। वह हर किसी को नीचा दिखाने की कोशिश करते। यहां तक कि वह अपने साथ शिक्षा ग्रहण कर रहे अपने मित्रों से भी दूरी बनाकर रहने लगे। यह बात स्वामी …

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ऐसे कीजिए अच्छे और बुरे की पहचान

गुरु द्रोणाचार्य ने शिक्षा पूरी होने पर कौरव और पांडव वंश के राजकुमारों दुर्योधन और युधिष्ठिर को परीक्षा के लिए बुलाया। गुरु द्रोण ने सबसे पहले युधिष्ठिर और दुर्योधन को एक अच्छा व्यक्ति ढूंढकर लाने को कहा। दोनों राजुकमार चल दिए।  सारा दिन खाली हाथ भटकने के बाद शाम को वापिस गुरुकुल आए। दुर्योधन बोला, गुरुजी मुझे तो कोई भी …

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ऐसा करेंगे तो होंगे चमत्कार

भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू एक समारोह में शिरकत करने के लिए गए। यह कार्यक्रम लंदन में होने वाला था। जब वे वहां पहुंचे तो वहां कई नेताओं से भेंट के दौरान एक क्षण ऐसा भी आया, जब विन्सटन चर्चिल और नेहरू आमने-सामने हुए। हालांकि चर्चिल नेहरूजी की सदैव ही आलोचना किया करते थे लेकिन उस समारोह में दोनों नेता …

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जानिए किसने कहा था, ‘निंदा को इसीलिए करें नजरअंदाज’

एक बार मुल्ला इस्माइल इसफहानी नमाज पढ़ रहे थे। एक दुष्ट व्यक्ति वहां से गुजरा और उन्हें अपशब्द कहने लगा। लेकिन मुल्ला साहब उस ओर ध्यान न देते हुए नमाज पढ़ते रहे। बाद में नमाज खत्म होने के बाद उनके एक शिष्य मिर्जा मुकीम ने पूछा, ‘यह दुष्ट आपको इतने अपशब्द कह रहा था, और आप उसे नजरअंदाज कर रहे …

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रानी लक्ष्मीबाई ने किसे दिया था करारा जबाव

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई बेबाक अपनी बात रखती थीं। एक बार वह एक कथावाचक के यहां पहुंची। उस समय वहां कथा चल रही थी। वह बाल विधवा होने के बावजूद कांच की चूड़ियों की बजाए सोने की चूड़ियां पहने हुईं थीं। उनके हाथों में चूड़ियों को देख, पंडित जी व्यंगात्मक लहजे में कहा, घोर कलयुग है। धर्म-कर्म की सारी मर्यादाएं …

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इन्होंने असफलता से चखा सफलता का स्वाद

जिंदगी बहुत कुछ कहती है। जरूरत है बस जिंदगी के हर पहलू पर गौर करने की। कुछ लोग इस जिंदगी से न हारते हुए कुछ ऐसा करते हैं जो हमेशा के लिए यादगार और प्रेरक बन जाता है। यहां पर कुछ ऐसे ही चर्चित हस्तियों के बारे में संक्षिप्त में उल्लेख है जिन्होंने पहले असफलता का स्वाद चखा और बाद …

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तो क्या ऐसी होती है ‘विद्या की रेखा’

बहुत पुरानी बात है। एक बार एक बालक को उसके पिताजी ने गुरुकुल में अध्ययन के लिए भेजा। उस बालक ने गुरुकुल में विद्या अध्ययन करने लगा। तभी एक दिन गुरुजी ने उस बच्चे को एक सबक याद करने के लिए दिया। लेकिन वह बहुत कोशिश करने के बाद भी सबक याद न कर सका। तब गुरुजी को गुस्सा आ …

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