श्यामा तेरे चरणों की, राधे तेरे चरणों की, गर धूल जो मिल जाए । सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए ॥ श्यामा तेरे चरणों की, राधे तेरे चरणों की सुनता हूँ तेरी रहमत, दिन रात बरसती है । एक बूँद जो मिल जाए, दिल की कली खिल जाए ॥ श्यामा तेरे चरणों की, राधे तेरे चरणों की यह मन …
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Aao kanhiya aao murari – Kanha bhajan
आओ कन्हैया आओ मुरारी,तेरे दर्र पे आया सुदामा भिखारी, आओ कन्हैया आओ मुरारी,तेरे दर्र पे आया सुदामा भिखारी, क्या मैं बटाओ क्या मैं सूनओ,एक दुख नही जो मैं मॅन में चुपऔ,क्या मैं बटाओ क्या मैं सूनओ,एक दुख नही जो मैं मॅन में चुपऔ,घाट घाट की जानते हो तुम हे मुरारी,घाट घाट की जानते हो तुम हे मुरारी,आओ कन्हैया आओ मुरारी,तेरे …
Read More »एल खेळ नदी बहवे ओ पाणी कित जासी राज
एल खेळ नदी बहवे ओ पाणी कित जासी राज,आधो जासी गळ्या गळ्या आधो इसर न्हासी राज, ईशर घणा बधावणा बहु गौरल जायो पूत राज,कानीराम घौड़ी घूघरा बहु लाडल माथा मोर राज,अलदा ल्यावो परदा ल्यावो बांधन वाळ बंधाओ राज,सार की सुई ल्यावो बाँट का तो तागा राज,सींव रै दरजी रा बेटा है भतीजा नागा राज़, सींवता पोवता दिन दस लाग्या राज …
Read More »सुदामा और श्रीकृष्ण
सुदामा ने एक बार श्रीकृष्ण से पूछा कान्हा, मैं आपकी माया के दर्शन करना चाहता हूं… कैसी होती है?”**********श्री कृष्ण ने टालना चाहा, लेकिन सुदामा की जिद पर श्री कृष्ण ने कहा, “अच्छा, कभी वक्त आएगा तो बताऊंगा। और फिर एक दिन कृष्ण कहने लगे… सुदामा, आओ, गोमती में स्नान करने चलें| दोनों गोमती के तट पर गए। वस्त्र उतारे| …
Read More »#महाभारत
#महाभारत युद्ध समाप्त हो चुका था. युद्धभूमि में यत्र-तत्र योद्धाओं के फटे वस्त्र, मुकुट, टूटे शस्त्र, टूटे रथों के चक्के, छज्जे आदि बिखरे हुए थे और वायुमण्डल में पसरी हुई थी घोर उदासी …. ! गिद्ध , कुत्ते , सियारों की उदास और डरावनी आवाजों के बीच उस निर्जन हो चुकी उस भूमि में #द्वापर का सबसे महान योद्धा “#देवव्रत” …
Read More »जटायु और भीष्म पितामह
जब रावण ने जटायु के दोनों पंख काट डाले… तो काल आया और जैसे ही काल आया … तो गीधराज जटायु ने मौत को ललकार कहा, — “खबरदार ! ऐ मृत्यु ! आगे बढ़ने की कोशिश मत करना… मैं मृत्यु को स्वीकार तो करूँगा… लेकिन तू मुझे तब तक नहीं छू सकता… जब तक मैं सीता जी की सुधि प्रभु …
Read More »अन्न की महिमा
यह एक आम कहावत है जिसका प्रयोग लगभग सभी ने कभी न कभी ज़रूर किया होगा । कहते है कि जैसा अन्न वैसा मन ======================= हम जो कुछ भी खाते है वैसा ही हमारा मन बन जाता है, अन्न चरित्र निर्माण करता है। इसलिए हम क्या खा रहे है। इस बात का सदा ध्यान रखना चाहिए। प्रकृति से हम जो …
Read More »वृन्दावन जाऊँगा
वृन्दावन जाऊँगा वृन्दावन जाऊँगामुझको रोको ना मैं तो वृन्दावन जाऊँगा वृन्दावन जाके मैं श्याम संग खेलूंगाश्याम संग खेलूंगा मैं ग्वालो संग खेलूंगासंग में उनके खेलूंगा संग में उनके खेलूंगामुझको रोको ना मैं तो वृन्दावन जाऊँगा वृन्दावन में कान्हा माखन चुरायेगामाखन चुरायेगा वो ग्वालो को खिलायेगासंग में उनके आऊगा संग में उनके आऊगामुझको रोको ना मैं तो वृन्दावन जाऊँगा वृन्दावन में …
Read More »काया नही रे सुहाणी भजन बिन
काया नही रे सुहाणी भजन बिनबिना लोण से दाल आलोणी भजन बिन गर्भवास म्हारी भक्ति क भूली नबाहर हूई न भूलाणीमोह माया म नर लिपट गयोसोयो तो भूमि बिराणी भजन बिन हाड़ मास को बणीयो रे पिंजरोउपर चम लिपटाणीहाथ पाव मुख मस्तक धरीयाँआन उत्तम दीरे निसाणी भजन बिन भाई बंधु और कुंटूंब कबिलाइनका ही सच्चा जायराम नाम की कदर नी …
Read More »श्रीकृष्ण – चरित्र (Krishna – Character)
समदर्शिता भगवान श्रीकृष्ण समदर्शी थे, और उनकी समदर्शिता की सीमा में केवल मनुष्य – समाज ही आता हो, सो बात नहीं, पशु – पक्षी, लता – वृक्ष आदि सभी के लिए उसमें स्थान था । उन्होंने गौओं की सेवा कर पशुओं में भी भगवान का वास दिखलाया । कदंब आदि वृक्षों के तले वन में विहार कर, उभ्दिज्ज – जगत …
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पौराणिक कथाओं, प्रेरक क्षण, मंदिरों, धर्मों, फिल्मों, हस्तियों के बारे में दिलचस्प जानकारी, हजारों गाने, भजन, आरती के बोल हैं Your wish may come true today…