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Rama

कैकेयी का अनुताप

kaikeyee ka anutaap

“यह सच है तो अब लौट चलो तुम घर को |” चौंके सब सुनकर अटल कैकेयी स्वर को | सबने रानी की ओर अचानक देखा, बैधव्य-तुषारावृता   यथा   विधु-लेखा | बैठी थी अचल तथापि असंख्यतरंगा , वह सिंही अब थी हहा ! गौमुखी गंगा — “हाँ, जनकर भी मैंने न भारत को जाना , सब सुन लें,तुमने स्वयं अभी …

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श्रीराम भक्त

shree raam jee aur shree krshn jee

भगवान श्रीरामचंद्र जी ऐसे शरणागतवत्सल हैं कि जो जीव एक बार भी सच्चे हृदय से उनके शरणागत हो गया, उसके वचन और कर्तव्य की चूक पर फिर कभी दृष्टि न देकर वे केवल उसके ‘हिए’ के निश्चय की ओर ही देखते हैं । वे कतहते हैं कि ‘इस जीवन ने अनन्य गति से मुझको अपना शरण्य निश्चय कर लिया है, …

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श्रीराम मर्यादा चरित्र

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पिता – भक्ति श्रीरघुनाथ जी नित्य प्राय: काल उठकर श्रीपिता जी को नमस्कार करते थे और अपने संपूर्ण कार्य उनकी आज्ञा के अनुसार करके अपनी सेवा से उन्हें प्रसन्न रखते थे । यहां तक कि उन्होंने अयोध्या की चक्रवर्ती राज्यश्री को पिता के वचन के नाते तृणवत् त्यागकर पितृभक्ति का अनुपम आदर्श चरितार्थ कर दिखाया । सारे संसार को आप …

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भक्तवत्सलता

Nahaye Dhoye ke jo mn ka mael na jaye bhajan

जिस भक्त पर भगवान श्रीराम की ममता (अपनापन) और प्यार हो गया, फिर उस पर करुणा के सिवा उन्हें कभी क्रोध आता ही नहीं । वे अपने भक्त के दोष को आंखों से देखकर भी ध्यान में नहीं लाते और यदि कहीं उसका गुण सुनने में भी आ गया तो संत – समाज में उसकी प्रशंसा करते हैं । भला, …

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श्री शबरी जी की भक्ति

shree shabaree jee kee bhakti

सबको परमगति प्रदान करते हुए उदारशिरोमणि भगवान शबरी को भी गति देने के लिए उसके आश्रम में पधारे । ‘आश्रम’ शब्द से शबरी जी का विरक्त होना सूचित किया गया है, क्योंकि वन में बहुत – से कोल – किरात आदि भी निवास करते हैं, परंतु उनके घरों को कभी ‘आश्रम’ नहीं कहा जाता । शबरी जी मन, वचन और …

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सुदर्शन पर जगदंबा की कृपा

ghoonghat ka pat khol re

अयोध्या में भगवान राम से कुछ पीढ़ियों बाद ध्रुवसंधि नामक राजा हुए । उनकी दो स्त्रियां थीं । पट्टमहिषी थी कलिंगराज वीरसेन की पुत्री मनोरमा और छोटी रानी थी उज्जयिनी नरेश युधाजित की पुत्री लीलावती । मनोरमा के पुत्र हुए सुदर्शन और लीलावती के शत्रुजित । महाराज की दोनों पर ही समान दृष्टि थी दोनों राजपुत्रों का समान रूप से …

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राम अंश

Nahaye Dhoye ke jo mn ka mael na jaye bhajan

अंसन्ह सहित मनुज अवतारा । लेहउं दिनकर बंस उदारा ।। ब्रह्मादि देवताओं की पुकार पर आकाशवाणी में ‘अंसन्ह सहित’ अवतार लेने की ब्रह्मगिरा हुई, उसी प्रकार श्रीस्वायंभुव मनु को भी वचन दिया गया – अंसन्ह सहित देह धरि ताता । करिहउं चरित भगत सुखदाता ।। अतएव इस बात की खोज आवश्यक है कि परम प्रभु के वे अंश कौन कौन …

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चक्रिक भील

dasha mujh deen kee bhagavan sambhaaloge to kya hoga

ब्राह्मण, श्रत्रिय, वैश्य, शूद्र और जो अन्य अन्त्यज लोग हैं, वे भी हरिभक्तिद्वारा भगवान की शपृरण होने से कृतार्थ हो जाते हैं, इसमें संशय नहीं है । यदि ब्राह्मण भी भगवान के विमुख हो तो उसे भी चाण्डाल से अधिक समझना चाहिए और यदि चाण्डाल भी भगवान का भक्त हो तो उसे भी ब्राह्मण से अधिक समझना चाहिए । द्वापर …

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गोपी गोपाला लाला

yahee haribhakt kahate hain

रासा मंदिरा माई थे थे थे तसुगंधी नृत्यते गाथा भाए गोपी गोपाला लाला रासा मंदिरा माई ड्रमा ड्रमा ड्रमा मृदंगा जानना ननाना रूपा रंगा दिखतदृगा टला लंगा अगलिता रासा नये राधा मुखा शरधचंद्रा चाचता मुखा जलजनाडा श्री ब्ृिजा जाना लटका लटका करता माकूता छाए ताकटका तका जमुना नीरा मोहे क़ाबला समीरा सालसला जया सूरदासा हे सूखे कृपरे गोपिका जीवना स्मरनाम …

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‪‎रामावतार‬

ghoonghat ka pat khol re

बहुत पुरानी कथा है। श्रीहरि के जय- विजय नाम के दो द्वारपाल थे। वे सनकादि ब्रह्मर्षियों के शाप से घोर निशाचर कुल में पैदा हुए। उनके नाम रावण और कुभ्करण थे। उनके अत्याचारों से पृथ्वी कांप उठी। वह पाप के भार को सह ना सकी। अंत में वह सभी देवताओं के साथ भगवान की शरण में गयी। देवताओं का प्रार्थना …

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