एक विधवा थी, उसका एक पुत्र था। पुत्र ज्यादा होशियार न था, लेकिन मां के प्रयासों के चलते वह पढ़-लिख गया। उस मां का बेटा वैज्ञानिक बनना चाहता था। एक दिन उसने अपनी मां से अपनी इच्छा प्रकट की। मां बोली, ‘बेटा! मैं तुझे वैज्ञानिक बनने में पूरी सहायता करूंगी।’ मां ने फिर एक वैज्ञानिक का पता लगाया, और उसके …
Read More »Gyan Ganga
कर्तव्य पूरा करना हर व्यक्ति का कर्तव्य है
पूना (महाराष्ट्र) के एक न्यू इंग्लिश हाईस्कूल में समारोह चल रहा था। मुख्य द्वार पर एक स्वयंसेवक नियुक्त था, जिसे यह कर्तव्य दिया गया कि वह हर आने वाले अतिथि का अभिवादन करे। इस कार्यक्रम में उस समय मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य न्यायाधीश महादेव गोविंद रानाडे आए। जैस ही वे वहां पहुंचे तो उस स्वयं सेवक ने उन्हें …
Read More »शुनशुनाओ की तरह सही सोच बनाती है महान
चीन के एक राजा थे नाम था ‘क्यांग’। उन्होंने शुनशुनाओ नाम के एक व्यक्ति को तीन बार अपना मंत्री बनाया और तीन बार ही हटा दिया। राजा के इस फैसले से शुनशुनाओ न तो कभी प्रसन्न हुए और न ही दुःखी। जब यह बात चीनी विद्वान किनबु को पता चली तो वो शुनशुनाओ से मिलने पहुंचे और किनबु ने इस …
Read More »सहिष्णुता के लिए जरूरी है धैर्य और विनम्रता
GURU AMAR DAS JI सिखों के तीसरे गुरु अमरदास जी के दामाद जेठाजी अत्यंत विनम्र और सहनशील व्यक्ति थे। वे गुरु अमरदास जी की बहुत सेवा करते थे। एक दिन उन्होंने जेठा जी और दूसरे दामाद रामा को एक चबूतरा बनाने के लिए कहा। दोनों ने चबूतरा बना दिया। चबूतरे को देखकर गुरुजी बोले, ‘यह सही नहीं है। दुबारा से …
Read More »स्वयं की अलग पहचान बनाना है तो कीजिए यह उपाय
एक गांव में एक किसान रहता था। वह रोज सुबह झरनों से साफ पानी लाने के लिए दो बड़े घड़े ले जाता था, जिन्हें वह डंडे में बांधकर अपने कंधे पर दोनों ओर लटका लेता था। उनमें से एक घड़ाकहीं से फूटा हुआ था, और दूसरा एकदम सही था। इस तरह रोज घर पहुंचते-पहुंचते किसान के पास डेढ़ घड़ा पानी …
Read More »मन से हारें नहीं कन्फ्यूशियस कहते हैं इस तरह रखें संयम
एक बार एक साधक ने कन्फ्यूशियस से पूछा, मैं मन पर संयम कैसे रखूं? कन्फ्यूशियस ने उस व्यक्ति से पूछा, क्या तुम कानों से सुनते हो? साधक ने कहा, हां, मैं कानों से ही सुनता हूं। तब कन्फ्यूशियस ने कहा, मैं नहीं मान सकता तुम मन से भी सुनते हो और उसे सुनकर अशांत हो जाते हो। इसलिए आज से …
Read More »दुर्जन से नहीं उनके दुर्गणों से घृणा करो
संत राबिया किसी धर्मग्रंथ का अध्ययन कर रही थीं। अचानक उनकी निगाह एक शब्द पर आकर रुक गई। वह शब्द था, ‘दुर्जनों से घृणा करो?’ वे कुछ देर तक उसी को दोहराती रहीं फिर उन्होंने उस पंक्ति को काट दिया। कुछ समय बाद दो संत उनके घर आए सामने रखे ग्रंथ पर उनकी निगाह पड़ी तो वे उस ग्रंथ को …
Read More »एक रूपये की कीमत
एक रूपये की कीमत बहुत समय पहले की बात है, सुब्रोतो लगभग 20 साल का एक लड़का था और कलकत्ता की एक कॉलोनी में रहता …
Read More »जहां धर्म वहां विजय
दोस्तों आज हम बात कर रहे हैं धर्म के बारे में। धर्म ही हमें जीना सिखाता है, हमें सही मार्ग पर चलना सिखाता है। या फिर कह सकते हैं कि धर्म इंसान के लिए ही बना है। संसार में बहुत सारे धर्म हैं। सभी धर्म हमें इंसानियत सिखाते हैं। धर्म कोई भी हो हमें सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए। …
Read More »पढ़िए नयनों की भाषा
एक युवक किसी सामान्य नौकरी की आकांक्षा लिए सर श्रीराम के पास पहुंचा। उन्होंनें उस युवक की आंखों की तरफ देखा और कुछ क्षण बाद बोले, यद्यपि तुम्हारी प्रतिभा और योग्यता उस पद से अधिक है, तथापि मैं तुम्हें अपनी मिल के एक विभाग का मैनेजर नियुक्त करता हूं। आनंद से विभोर उस युवक की आंखें खुशी के आंसु …
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पौराणिक कथाओं, प्रेरक क्षण, मंदिरों, धर्मों, फिल्मों, हस्तियों के बारे में दिलचस्प जानकारी, हजारों गाने, भजन, आरती के बोल हैं Your wish may come true today…