यह व्रत कार्तिक लगते ही अष्टमी को किया जाता है। जिस वार को दीपावली होती है, अहोई अष्टमी उससे ठीक सात दिन पूर्व उसी वार को पड़ती है। इस व्रत को वह स्त्रियां ही करती हैं जिनकी संतान होती है। बच्चों की मां दिनभर व्रत रखें। सांयकाल दीवार पर अष्ट कोष्ठक की अहोई की पुतली रंग भरकर बनाएं। उस पुतली …
Read More »Gyan Ganga
दीर्घजीवी होने का रहस्य विनम्रता में निहित
एक साधु थे अत्यंत विनम्र, त्यागी और मधुरभाषी। उनका शिष्य वृंद काफी विशाल था। वे सदैव परोपकार में लगे रहते और सादा जीवन व्यतीत करते। जब उन्हें लगा कि अंतिम समय निकट आ गया है तो उन्होंने अपने सभी शिष्यों को बुलाया और बोले- देखो अब भगवान का बुलावा किसी भी समय आ सकता है। जाते जाते तुम्हें अंतिम उपदेश …
Read More »जीत हमेशा सत्य की होती है
एक दिन ब्राह्मण ने मार्ग पर चलते हुए एक हीरा मिला, जिसकी कीमत एक लाख रुपए थी। वह साधारण रूप से ही हीरे को लिए हुए जा रहा था। कि आगे की ओर से एक जौहरी जगह-जगह भूमि को देखता हुआ आ रहा था। वह व्याकुल था। ब्राह्मण ने उसे देखकर पूछा, ‘‘जौहरी भाई, तुम व्याकुल क्यों है ? देख, …
Read More »भगवान श्रीब्रह्मा(bhagavaan shree brahma)
महाप्रलय के बाद भगवान नारायण दीर्घ कालतक योगनिद्रा में निमग्र रहे। योगनिद्रा से जगने के बाद उनकी नाभि से एक दिव्य कमल प्रकट हुआ। जिसकी कर्णिकाओंपर स्वयम्भू श्रीब्रह्मा प्रकट हुए। उन्होंने अपने नेत्रों को चारों ओर घुमाकर शून्य में देखा। इस चेष्टा से चारों दिशाओं में उनके चार मुख प्रकट हो गये। जब चारों ओर देखने से उन्हें कुछ भी …
Read More »Bhakti Tirtha Swami Publication
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Read More »bhakti tirtha swami Audio Video
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Read More »स्वार्थरहित होकर किया गया दान ही श्रेष्ठ
महाभारत में एक कथा है, जो सच्ची दानवीरता की मिसाल है। एक बार की बात है कुरु युवराज दुर्योधन के महल के द्वार पर एक भिक्षुक आया और दुर्योधन से बोला- राजन, मैं अपनी वृद्धावस्था से बहुत परेशान हूं। चारों धाम की यात्रा करने का प्रबल इच्छुक हुं, जो युवावस्था के ऊर्जावान शरीर के बिना संभव नहीं है। इसलिए आप …
Read More »जहां आदर, सत्कार हो वहीं विराजती हैं लक्ष्मी
कहा जाता है कि देवी लक्ष्मी की असुरों पर बड़ी कृपा थी। वे उनके वहां निवास करती थीं एक बार देवी लक्ष्मी स्वर्ग में रहने के लिए आई। तब इंद्र को बड़ा आश्चर्य हुआ। इंद्र ने देवी लक्ष्मी से पूछा- भगवती, आखिर ऐसा कौन सा कारण है कि आप असुरो को छोड़ स्वर्ग में रहने के लिए आई हैं। तब …
Read More »श्रीराम-राज्याभिषेक
रात्रि में विश्राम के बाद प्रात: काल विभीषण ने श्रीराम से हाथ जोड़कर कहा- प्रभो! अब आप स्नान करके दिव्य वस्त्र, मालांए तथा अंगराग का सदुपयोग करें। उसके बाद सुंदर व्यंजनों को स्वीकार कर मुझे कुछ दिन अपने आतिथ्य-सत्कार का सौभाग्य प्रदान करें। भगवान श्रीराम ने कहा –विभीषण! मेरे लिए इस समय सत्य का आश्रय लेने वाले महाबाहु भरत बहुत …
Read More »मंगलवार व्रत की कथा
भगवान शिव के एकादश रुद्रावतारों में से एक हैं हनुमानजी। कलयुग में हनुमान जी उपासना से शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव हैं। यदि सच्चे मन से महाबली पवन पुत्र की आराधना की जाए तो वह अपने भक्त का हर मनोरथ पूर्ण कर देते हैं। प्राचीन समय की बात है किसी नगर में एक ब्राह्मण दंपत्ति रहते थे उनके कोई संतान …
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पौराणिक कथाओं, प्रेरक क्षण, मंदिरों, धर्मों, फिल्मों, हस्तियों के बारे में दिलचस्प जानकारी, हजारों गाने, भजन, आरती के बोल हैं Your wish may come true today…