महाभारत की एक कथा है। धर्मयुद्ध अपने अंतिम चरण में था। भीष्म पितामह शैय्या पर लेटे हुए अपने जीवन के आखिरी क्षण गिन रहे थे। उन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान मिला हुआ था और वे सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण होने की प्रतीक्षा कर रहे थे। धर्मराज युधिष्ठिर जानते थे कि पितामह ज्ञान और जीवन संबंधित अनुभव से संपन्न हैं। …
Read More »Gyan Ganga
प्रदोष व्रत का महत्त्व
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत प्रत्येक मास की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। यह व्रत कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष दोनों को किया जाता है। प्रदोष व्रत में भगवान शिव की उपासना की जाती है। यह व्रत हिंदू धर्म के सबसे शुभ व महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है। जानिए इसकी पूजन विधि, कथा और महत्त्व …
Read More »शिक्षाप्रद कहानियां- जल्दबाजी का फल
एक समय की बात है। गरीबी से परेशान एक युवक अपना जीवन समाप्त करने के लिए नदी पर गया, वहां युवक को एक साधु मिल गए उन्होंने उसे ऐसा करने के लिए मना कर दिया। साधु ने युवक की परेशानी का कारण पूछा। युवक ने सारी बात साधु को बता दी। सब कुछ सुनकर साधु ने कहा- मेरे पास एक …
Read More »गिलहरी का रामसेतु बनाने में योगदान
माता सीता को वापस लाने के लिए रामसेतु बनाने का कार्य चल रहा था। भगवान राम को काफी देर तक एक ही दिशा में निहारते हुए देख लक्ष्मण जी ने पूछा भैया आप इतनी देर से क्या देख रहें हैं? भगवान राम ने इशारा करते हुए दिखाया कि वो देखो लक्ष्मण एक गिलहरी बार-बार समुद्र के किनारे जाती है और …
Read More »चाणक्य की सीख
बात 325 ई. पू. की है, जब भारत में मौर्य वंश का शासन था। सम्राट चंद्रगुप्त एक कुशल योद्धा, सेनानायक तथा महान विजेता ही नहीं थे, बल्कि एक योग्य शासक भी थे और उनकी सुदृढ़ शासन व्यवस्था का प्रमुख आधार चंद्रगुप्त मौर्य के महामंत्री चाणक्य थे। शासन व्यवस्था पर उनका पूरा अंकुश था। कहा जाता है एक दिन एक विदेशी …
Read More »शिक्षाप्रद कहानियां- आत्म संतोष का गुण
एक गांव में एक गरीब आदमी रहता था। वह बहुत मेहनत करता, किंतु फिर भी वह धन न कमा पाता। इस प्रकार उसके दिन बड़ी मुश्किल से बीत रहे थे। कई बार तो ऐसा हो जाता कि उसे कई कई दिनों तक सिर्फ एक वक्त का खाना खाकर ही गुजारा करना पड़ता। इस मुसीबत से छुटकारा पाने का कोई उपाय …
Read More »अवसर की पहचान करना जरूरी…
एक बार एक ग्राहक चित्रों की दुकान पर गया। उसने वहाँ पर अजीब से चित्र देखे। पहले चित्र में चेहरा पूरी तरह बालो से ढँका हुआ था और पैरों में पंख थे। एक दूसरे चित्र में सिर पीछे से गंजा था। ग्राहक ने पूछा- यह चित्र किसका है? दुकानदार ने कहा- अवसर का। ग्राहक ने पूछा- इसका चेहरा बालो से …
Read More »संत कबीरदास जंयती पर विशेष- कबीर दास की शिक्षा
एक ब्राह्मण हमेशा धर्म-कर्म में मग्न रहता था। उसने जीवनभर पूजा पाठ किए बिना कभी भी अन्न ग्रहण नहीं किया था। जब वृद्धावस्था आई तो वह बीमार पड़ गया और अपना अंत समय निकट जानकर विचार करने लगा, काश! प्राण निकलने से पूर्व मुझे गंगाजल की एक बूंद मिल जाती तो मेरे पापों का नाश हो जाता और मुझे मुक्ति …
Read More »शिक्षाप्रद कहानियां- रानी का हार
एक बार की बात है। एक बहुत ही बड़े साम्राज्य का राजा था। इस कारण उसकी रानी के पास गहनें, हीरे, मोतियों और माणिक्य आदि के अम्बार लगे थे। उन सभी गहनों में से रानी को एक नौलखा हीरों का हार बहुत प्रिय था। एक बार रानी नहाकर अपने महल की छत पर बाल सुखाने के लिए गई। रानी के …
Read More »आखिर क्यों दिया था माता पार्वती ने भगवान शिव, विष्णु, नारद, कार्तिकेय और रावण को श्राप!!
एक बार भगवान शंकर ने माता पार्वती के साथ जुआ खेलने की अभिलाषा प्रकट की। खेल में भगवान शंकर अपना सब कुछ हार गए। हारने के बाद भोलेनाथ अपनी लीला को रचते हुए पत्तों के वस्त्र पहनकर गंगा के तट पर चले गए। कार्तिकेय जी को जब सारी बात पता चली, तो वह माता पार्वती से समस्त वस्तुएँ वापस लेने …
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पौराणिक कथाओं, प्रेरक क्षण, मंदिरों, धर्मों, फिल्मों, हस्तियों के बारे में दिलचस्प जानकारी, हजारों गाने, भजन, आरती के बोल हैं Your wish may come true today…