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Gyan Ganga

हरि ॐ क्यों

krshnadarshan - bhagavaan shiv ke avataar

वेद पाठ के आरम्भ में मन्त्रोच्चारण से पूर्व हरि ॐ, उच्चारण करना वैदिकों की परम्परागत प्रणाली है इसका तात्पर्य यह है कि वेद के अशुद्ध उच्चारण में महापातक लगता है और बहुत सावधान रहने पर भी मनुष्य स्वभाव सुलभ स्वर वर्ण जन्य अशुद्धी हो जाने की पूरी सम्भावना रहती है अत: इस सम्भावित प्रत्यवाय की निवृति के लिए आदि और …

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क्या है शनि की क्रूर दृष्टि के पीछे की वजह !

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शनैश्चर का शरीर- कान्ति इन्द्रनील मणि के समान है। इनके सिरपर स्वर्ण मुकुट गले में माला तथ शरीर पर नीले रंग के वस्त्र सुशोभित हैं। ये गिद्ध पर सवार रहते हैं। हाथों में क्रमशः धनुष, बाण , त्रिशुल और वरमुद्रा धारण करते हैं।शनि भगवान सूर्य तथा छाया (संवर्णा) के पुत्र हैं। ये क्रूर ग्रह माने जाते हैं। इनकी दृष्टि में …

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एक ऐसा तीर्थ जहां स्वयं प्रभु राम ने की थी शिव जी की आराधना

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रामेश्वर ज्योतिर्लिंग में एकादशवें पर है श्री “रामेश्वर”। रामेश्वरतीर्थ को ही सेतुबन्ध तीर्थ कहा जाता है। यह स्थान तमिलनाडु के रामनाथम जनपद में स्थित है। यहाँ समुद्र के किनारे भगवान श्री रामेश्वरम का विशाल मन्दिर शोभित है। कहा जाता है कि इसी स्थान पर श्रीरामचंद्रजी ने लंका के अभियान के पूर्व शिव की अराधना करके उनकी मूर्ति की स्थापना की …

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ईश्वर पर विश्वास

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किसी जंगल मे एक गर्भवती हिरणी थी, जिसका प्रसव होने को ही था | उसने एक तेज धार वाली नदी के किनारे घनी झाड़ियों और घास के पास एक जगह देखी जो उसे प्रसव हेतु सुरक्षित स्थान लगा| अचानक उसे प्रसव पीड़ा शुरू होने लगी, लगभग उसी समय आसमान मे काले काले बादल छा गए और घनघोर बिजली कड़कने लगी …

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क्या मरना भी मुहूर्त में ही?

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मुहूर्त विज्ञान उपक्रम मे इस बात का उदाहण मिलता है कि यदि मरने का मुहूर्त नहीं बनता था तो वे लोग अपना मरना भी स्थगित कर देते थे। आर्य जाति के गौरवपूर्ण इतिहास ग्रंथ में वर्णन आता है कि महाभारत के संग्राम के समय जब नौ दिन में ही भीष्मजी द्वारा कौरव सेना का संचालन करते हुए पांडवों की आधी …

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हनुमान जी संजीवनी बूटी के लिए उखाड़ ले गए थे द्रोणगिरि-उत्तराखंड

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उत्तराखंड के चमोली जनपत स्थित एक गांव है द्रोणगिरि। यहां पर स्थित पर्वत के बारे में मान्यता है कि यह वही पर्वत है जिसे हनुमान जी संजीवनी बूटी के लिए उखाड़ ले गए थे।…… रामायण की कथा के अनुसाल लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध में मेघनाद के वार से लक्ष्मण मूर्छित होकर युद्धस्थल में गिर गए थे। जिसके बाद सुषेन वैद्य को बुलाया …

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महज एक रात में निर्मित हुआ था विशालकाय भोजेश्वर शिव मंदिर. रायसेन, भोपाल, मध्यप्रदेश

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महज एक रात में निर्मित हुआ था विशालकाय भोजेश्वर शिव मंदिर…….. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से 32 किलोमीटर की दूरी पर ‘रायसेन’ जिले में स्थित यह मंदिर ‘उत्तर भारत का सोमनाथ’ कहा जाता है। यह भोजपुर से लगती हुई पहाड़ी पर एक विशाल, किन्तु अधूरा शिव मंदिर है। भोजेश्वर महादेव अपने आप में एक अनूठा शिव मंदिर है। इसका निर्माण …

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बुधवार को करें भगवान गणेश की पूजा!

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श्री गणेश को सभी दुखों का पालनहार माना जाता है। गणेश जी को भौतिक, दैहिक और अध्यात्मिक कामनाओं के सिद्धि के लिए सबसे पहले पूजा जाता है। वे भक्तों की बाधा, संकट, रोग-दोष तथा दरिद्रता को दूर करते हैं। इसलिए इन्हें गणाध्यक्ष और मंगलमूर्ति कहा जाता हैं। शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि श्री गणेश जी विशेष पूजा का …

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माता सुमित्रा

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महाराजा दशरथ की कई रानियाँ थीं। महारानी कौसल्या पट्टमहिषी थीं। महारानी कैकेयी महाराजा को सर्वाधिक प्रिय थीं और शेष में श्री सुमित्रा जी ही प्रधान थीं। महाराज दशरथ प्रायः कैकेयी के महल में ही रहा करते थे। सुमित्रा जी महारानी कौसल्या के सन्न्किट रहना तथा उनकी सेवा करना अपना धर्म समझती थीं। पुत्रेष्टि –यज्ञ समाप्त होने पर अग्नि के द्वारा …

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जो हाथ से चला गया उसका दुख क्या करना!

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एक आदमी तड़के नदी की ओर जाल लेकर जा रहा था। नदी के पास पहुंचने पर उसे आभास हुआ कि सूर्य अभी पूरी तरह बाहर नहीं निकला हैं। घने और अंधेरे में वह मस्ती से टहलने लगा। तभी उसका पैर झोले से टकराया। उत्सुकतापूर्वक उसने झोले में हाथ डाला तो पाया कि उसमें बहुत बड़े-बड़े चमकीले पत्थर भरे पड़े हैं। …

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