नारदजी बोले:- सब मुनियों को भी जो दुष्कर कर्म है ऐसा बड़ा भारी तप जो इस कुमारी ने किया वह हे महामुने! हमसे सुनाइये ॥ श्रीनारायण बोले अनन्तर ऋषि-कन्या ने भगवान् शिव, शान्त, पंचमुख, सनातन महादेव को चिन्तन करके परम दारुण तप आरम्भ किया ॥ सर्पों का आभूषण पहिने, देव, नन्दी-भृंगी आदि गणों से सेबित, चौबीस तत्त्वों और तीनों गुणों …
Read More »Punaya Paap
पुरुषोतम मास /अधिक मास माहात्म्य अध्याय – 8
सूतजी बोले हे तपोधन! विष्णु और श्रीकृष्ण के संवाद को सुन सन्तुष्टमन नारद, नारायण से पुनः प्रश्न करने लगे ॥ १ ॥ adhik mas नारदजी बोले:- हे प्रभो! जब विष्णु बैकुण्ठ चले गये तब फिर क्या हुआ? कहिये। आदिपुरुष कृष्ण और हरिसुत का जो संवाद है वह सब प्राणियों को कल्याणकर है ॥ २ ॥ इस प्रकार प्रश्न को सुन …
Read More »सबसे कीमती चीज!!
सीलमपुर गांव में एक भिखारी रहता था। वह बड़ी मुश्किल से अपना गुजारा करता था। उसे ठीक से खाने या पिने नहीं मिलता था, जिस वजह से उसका बूढ़ा शरीर सूखकर कांटा हो गया था। वह अपने आप को बहुत ही कमज़ोर महसूस करने लगा था। एक दिन वह रास्ते के एक ओर बैठकर गिड़गिड़ाते हुए भीख मांगा करता था। …
Read More »मैं भी तो ब्राह्मण हूं
, जो एक जनेऊ हनुमान जी के लिए ले आये थे। संयोग से मैं उनके ठीक पीछे लाइन में खड़ा था, मेंने सुना वो पुजारी से कह रहे थे कि वह स्वयं का काता (बनाया) हुआ जनेऊ हनुमान जी को पहनाना चाहते हैं, पुजारी ने जनेऊ तो ले लिया पर पहनाया नहीं। जब ब्राह्मण ने पुन: आग्रह किया तो पुजारी बोले यह तो हनुमान जी का श्रृंगार है इसके लिए बड़े पुजारी (महन्त) जी से अनुमति लेनी होगी,
Read More »पुरुषोतम मास /अधिक मास माहात्म्य अध्याय – 6
नारदजी बोले– भगवान् गोलोक में जाकर क्या करते हैं ? हे पापरहित! मुझ श्रोता के ऊपर कृपा करके कहिये ॥ १ ॥ श्रीनारायण बोले – हे नारद! पापरहित! अधिमास को लेकर भगवान् विष्णु के गोलोक जाने पर जो घटना हुई वह हम कहते हैं, सुनो ॥ २ ॥ उस गोलोक के अन्दर मणियों के खम्भों से सुशोभित, सुन्दर पुरुषोत्तम के धाम …
Read More »पुरुषोतम मास /अधिक मास माहात्म्य अध्याय– 1
कल्प वृक्ष के समान भक्तजनों के सभी मनोरथ पूर्ण करने वाले, वृंदावन की शोभा के अधिपति, आलोकिक कार्यो द्वारा, समस्त लोको को चकित करने वाले, वृंदावन बिहारी पुरुषोत्तम भगवान को नमस्कार करते है। नारायण, नर, नरोत्तम तथा देवी सरस्वती और श्रीव्यासजी को प्रणाम करती हूँ। एक समय बहुत बड़ा यज्ञ करने की इच्छा से परम पवित्र नैमिषारण्य तीर्थ में बहुत …
Read More »ॐ नमः शिवाय मंत्र का शुद्ध उच्चारण
अभी सावन का महीना प्रारम्भ होने वाला है। आपने देखा होगा की सभी मंदिर में जाते हैं और जप करते हैं ॐ नमः शिवाय। यह मंत्र भगवान् शिव का एकाक्षरी बीज मंत्र है और बहुत ही शक्ति प्रदान करने वाला है। इस मंत्र का यदि हम जाप करते हैं तो शनि राहु केतु कोई भी ग्रह अगर गलत चल रहा …
Read More »पाप और पुण्य
वह सभी कार्य जिनसे दूसरों को किसी भी तरह का दुख, तकलीफ़ या नुकसान हो वह पाप है, और वह कार्य जिनसे दूसरों का फायदा हो वह पुण्य है। ऐसा कोई भी कार्य नहीं है जिससे केवल पुण्य हो और ऐसा कोई भी कार्य नहीं है जिससे केवल पाप हो। धर्म अनुसार प्रमुख दस पुण्य और दस पाप। इन्हें जानकर …
Read More »चातुर्मास और आयुर्वेद का संबंध
चातुर्मास में मांसाहार भोजन, मदिरा, पत्तेदार सब्जियां और दही से परहेज करना चाहिए. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर क्यों चातुर्मास में इन चीजों का सेवन वर्जित माना गया है. इस बारे में आयुर्वेद में बताया गया है कि, चातुर्मास के चार महीने में मौसम में बदलाव होते हैं. सावन में बारिश होती है, भाद्रपद में आद्रता या नमी …
Read More »पवित्रीकरण मंत्र
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपिवा ।।यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्यभ्यन्तरः शुचिः ॥ॐ पुनातु पुण्डरीकाक्षः।।
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पौराणिक कथाओं, प्रेरक क्षण, मंदिरों, धर्मों, फिल्मों, हस्तियों के बारे में दिलचस्प जानकारी, हजारों गाने, भजन, आरती के बोल हैं Your wish may come true today…