भोजन करिअ तृपिति हित लागी । जिमि सो असन पचवै जठरागी ।। असि हरि भगति सुगम सुखदाई । को अस मूढ़ न जाहि सोहाई ।। भाव यह कि भगवद्भक्ति मुंह में कौर ग्रहण करने के समान ही सुगम है – ‘भोजन करिअ तृपिति हित लागी ।’ वैसे ही वह सुखदायी भी है – ‘जिमि सो असन पचवै जठरागी ।।’ जिस …
Read More »Story Katha
शिव जी का किरात वेष में प्रकट होना
इंद्र के उपदेश तथा व्यास जी की आज्ञा से अर्जुन भगवान महेश्वर की आराधना करने लगे । उनकी उपासना से ऐसा उत्कृष्ट तेज प्रकट हुआ, जिससे देवगण विस्मिल हो गये । वे शिव जी के पास गये और बोले – ‘प्रभो ! एक मनुष्य आपकी तपस्या में निरत है । वह जो कुछ चाहता है, उसे आप प्रदान करें ।’ …
Read More »सीता शुकी संवाद
एक दिन परम सुंदरी सीता जी सखियों के साथ उद्यान में खेल रही थीं । वहां उन्हें शुक पक्षी का एक जोड़ा दिखायी दिया जो बड़ा मनोरम था । वे दोनों पक्षी एक डाली पर बैठकर इस प्रकार बोल रहे थे – ‘पृथ्वी पर श्रीराम नाम से प्रसिद्ध एक बड़े सुंदर राजा होंगे । उनकी महारानी सीता के नाम से …
Read More »श्रीकैकेयी और सुमित्रा माता के चरित्र से शिक्षा
भरत माता श्री कैकेयी जी के चरित्रों से प्रकट और गुप्त – दो प्रकार की शिक्षाएं लौकिक तथा पारलौकिक रूपों में मिलती हैं । प्रथम प्रकटरूप में लोकशिक्षा को स्पष्ट किया गया है – जैसे कोई कैसा भी भला ऎघर क्यों न हो, घरवालों में परस्पर कैसी भी प्रीति क्यों न हो, घर की स्त्रियां कैसी भी सुयोग्य और सुबोध …
Read More »भव – भगवान शिव के अवतार (the incarnation of Lord Shiva)
भगवान रुद्र के स्वरूप का नाम भव है । इसी रूप में वे संपूर्ण सृष्टि में व्याप्त हैं तथा जगद्गुरु के रूप में वेदांत और योग का उपदेश देकर आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं । भगवान रुद्र का यह स्वरूप जगद्गुरु के रूप में वंदनीय है । भव – रुद्र की कृपा के बिना विद्या, योग, ज्ञान, भक्ति …
Read More »सत्कर्म में श्रमदान का अद्भुत फल
बृहत् कल्प की बात है । उस समय धर्ममूर्ति नामक एक प्रभावशाली राजा थे । उनमें कुछ अलौकिक शक्तियां थीं । वे इच्छा के अनुसार रूप बदल सकते थे । उनकी देह से तेज निकलता रहता था । दिन में चलते तो सूर्य की प्रभा मलिन हो जाती थी और रात में चलते तो चांदनी फीकी पड़ जाती थी । …
Read More »भक्तों की तीन श्रेणियां (Three categories of devotees)
भक्तों की तीन श्रेणियां होती हैं । एक तो वे होते हैं जो किसी फल की कामना से भगवान को भजते हैं । भगवान कहते हैं – उनकी भक्ति वास्तविक भक्ति नहीं, वह तो एक प्रकार की स्वार्थपरायणता है । दूसरी श्रेणी के भक्त वे हैं जो बिना किसी फल की इच्छा के अपना सर्वस्व उन्हें समर्पित कर सदा उनकी …
Read More »शिव जी का हनुमान के रूप में अवतार
एक समय की बात है, भगवान शिव ने भस्मासुर की तपस्या से प्रसन्न होकर उसे वरदान दे दिया कि तुम जिसके सिर पर अपना हाथ रख दोगे, वह जल कर भस्म हो जायेगा । भस्मासुर ने पार्वती के सौंदर्य पर मोहित होकर उन्हें प्राप्त करने के लिए भगवान शिव को भस्म करने का उपक्रम किया । उस समय भगवान विष्णु …
Read More »नल दमयंती के पूर्व जन्म का वृतांत
पूर्वकाल में आबू पर्वत के समीप एक आहुक नामक भील रहता था । उसकी पत्नी का नाम आहुजा था । वह बड़ी पतिव्रता तथा धर्मशीला थी । वे दंपत्ति बड़े शिवभक्त एवं अतिथि सेवक थे । एक बार भगवान शंकर ने इनकी परीक्षा लेने का विचार किया । वे एक यतिका रूप धारण करके संध्या समय आहुक के दरवाजे पर …
Read More »व्रज जीवन का संगठन और तैयारी
शैशव काल से ही भगवान ने अपने प्रेम के प्रभाव से सारे वज्र को एकता के सांचे में ढाल दिया था । पहले तो जैसा हम ऊपर कह आये हैं, उन्होंने सब लोगों के हित की दृष्टि से सारे वज्र की संपत्ति को बराबर बांट दिया और मनुष्यों, पशुओं तथा प्रकृति को एकता के सूत्र में बांध दिया । साथ …
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