बचपन से पचपन का समय बड़ा ही रोमांचक होता है। लेकिन एक छोटी सी बालिका गौंझा जिसे बचपन में कोई नहीं जानता था, पचपन वर्ष तक आते-आते वह दुनिया के लिए एक मिशाल बन गई। बालिका गौंझा बहुत ही चंचल थी। वह अक्सर लोगों की नकल उतारकर अपनी दोस्तों के मायूस चेहरे पर खुशी की फुहार बिखेर देती थी। एक …
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