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Guru Parvachan

पवित्रीकरण मंत्र

पवित्रीकरण मंत्र

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपिवा ।।यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्यभ्यन्तरः शुचिः ॥ॐ पुनातु पुण्डरीकाक्षः।।

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जब भी आपका मन बहुत विचलित हो

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जब भी आपका मन बहुत विचलित हो , सिर दर्द हो , थकान हो , शरीर से लेकर मन में शिथिलता हो , मन बहुत ही व्यग्र हो , आपको शांति चाहिए हो , तब एक काम कीजियेगा ।

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गणेश मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः

इस मंत्र के जाप से मन को शांति मिलती है आपकी काम के प्रति एकाग्रता बनी रहती है और मन के साथ शरीर भी स्वस्थ बना रहता है।

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महात्मा बुद्घ का सत्संग

एक बार किसी गांव में महात्मा बुद्घ का सत्संग हुआ। सब इस होड़ में लग गए कि क्या भेंट करें?सुदास नाम का एक मोची था। उसने देखा कि मेरे घर के बाहर के तालाब में एक कमल खिला है। उसकी इच्छा हुई कि आज नगर में महात्मा बुद्घ आए हैं। सब लोग तो उधर ही गए हैं, तो आज यह …

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गौतम बुद्ध और शिकारी

गौतम बुद्ध और शिकारीएक समय की बात है, महात्मा बुद्ध अपनी तपस्या में लीन थे, उन्हें तपस्या में बैठे हुए कई दिन बीत चुके थे। तभी एक शिकारी उस रास्ते जा रहा था उस शिकारी ने महात्मा बुद्ध को पहचान लिया। शिकारी ने महात्मा बुद्ध के बारे में बहुत बढ़ाई सुनी थी, किंतु वह महात्मा बुद्ध की बडाई से संतुष्ट …

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श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी

श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज का पावन चरित्र

प्रारंभिक बचपन: एक अव्यक्त आध्यात्मिक स्पार्क पूज्य महाराज जी एक मामूली और अत्यंत पवित्र (सात्विक) ब्राह्मण (पांडे) परिवार में पैदा हुए थे और उनका नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। उनका जन्म अखरी गाँव, सरसोल ब्लॉक, कानपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनके दादा एक सन्यासी (सन्यासी) थे और समग्र घरेलू वातावरण गहरा भक्तिपूर्ण, अत्यंत शुद्ध और निर्मल था। उनके पिता …

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यह है दक्षिण भारत का एक ग्रन्थ

अति दुर्लभ एक ग्रंथ ऐसा भी है हमारे सनातन धर्म मेंइसे तो सात आश्चर्यों में से पहला आश्चर्य माना जाना चाहिए —यह है दक्षिण भारत का एक ग्रन्थक्या ऐसा संभव है कि जब आप किताब को सीधा पढ़े तो राम कथा के रूप में पढ़ी जाती है और जब उसी किताब में लिखे शब्दों को उल्टा करके पढ़ेतो कृष्ण कथा …

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जय श्री राम

कई लोग ये पूछते हैं कि श्रीराम ने धनुष उठा कर स्वयंवर की शर्त तो पूरी कर ही दी थी, फिर उस धनुष को भंग करने की क्या आवश्यकता थी?यदि आप मेरा दृष्टिकोण पूछें तो मैं यही कहूंगा कि उस धनुष की आयु उतनी ही थी। अपना औचित्य (देवी सीता हेतु श्रीराम का चुनाव) पूर्ण करने के उपरांत उस धनुष …

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शास्त्रों के अनुसार पूजा अर्चना में वर्जित काम

१) गणेश जी को तुलसी न चढ़ाएं२) देवी पर दुर्वा न चढ़ाएं३) शिव लिंग पर केतकी फूल न चढ़ाएं४) विष्णु को तिलक में अक्षत न चढ़ाएं५) दो शंख एक समान पूजा घर में न रखें६) मंदिर में तीन गणेश मूर्ति न रखें७) तुलसी पत्र चबाकर न खाएं८) द्वार पर जूते चप्पल उल्टे न रखें९) दर्शन करके बापस लौटते समय घंटा …

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