आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा भी कहते है। इस दिन गुरु की पूजा का विधान है। कहते हैं कि इस दिन गुरु की पूजा करने से वर्ष भर की पूर्णिमाओं के सत्कर्मो का फल मिलता है। महाभारत के रचयिता वेद व्यास का जन्मदिन भी आज ही के दिन मनाया जाता है। उन्होंने चारो वेदों की भी रचना की …
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भगवान विष्णु के हयग्रीवावतार की कथा
एक समय की बात है। हयग्रीव नाम का एक परम पराक्रमी दैत्य हुआ। उसने नदी के तट पर भगवती महामाया की प्रसनन्ता के लिए बड़ी कठोर तपस्या की। वह बहुत दिनों तक बिना कुछ खाये भगवती के मायाबीज एकाक्षर महामन्त्र का जप करता रहा। उसकी इंन्द्रियाँ उसके वश में हो चुकी थीं। सभी भोगों का उसने त्याग कर दिया था। …
Read More »शिक्षाप्रद कहानियां- सदा दुःखी रहता है समय गंवाने वाला
किसी गांव में एक व्यक्ति रहता था। वह बहुत ही भला था लेकिन उसमें एक दुर्गुण था वह हर काम को टाला करता था। वह मानता था कि जो कुछ होता है भाग्य से होता है। एक दिन एक साधु उसके पास आया। उस व्यक्ति ने साधु की बहुत सेवा की। उसकी सेवा से खुश होकर साधु ने पारस पत्थर …
Read More »विलक्षण गुरुदक्षिणा
आचार्य द्रोण का अपमान उनके सहपाठी पांचाल नरेश द्रुपद ने यह कह कर दिया कि एक राजा की तुम्हारे जैसे श्रीहीन और निर्धन मनुष्य के साथ कैसी मित्रता? इस तरह राजा द्रुपद से अपमानित हो बदला लेने की भावना से आचार्य द्रोण हस्तिनापुर में राजकुमारों को अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा देने लगे। एक दिन आचार्य द्रोण ने अपने शिष्यों से कहा …
Read More »सावन में सोमवार का हैं खास महत्त्व
पवित्र सावन माह की शुरुआत हो गई है। शिव पूजा के लिए अत्यंत फलदायी माने जाने वाले इस माह में सोमवार के दिन भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा का महत्त्व है। आज सावन का पहला सोमवार है। भगवान शिव को सावन यानी श्रावण का महीना बेहद प्रिय है जिसमें वह अपने भक्तों पर अतिशय कृपा बरसाते हैं। ऐसी मान्यता है …
Read More »क्यों प्रिय है भगवान शिव को बेलपत्र
शिव पूजा का सबसे पावन दिन है सोमवार। सभी देवों में शिव ही ऐसे देव हैं जो अपने भक्तों की भक्ति-पूजा से बहुत जल्दी ही प्रसन्न हो जाते हैं। शिव भोले को आदि और अनंत माना गया है जो पृथ्वी से लेकर आकाश और जल से लेकर अग्नि हर तत्व में विराजमान हैं। शिव पूजा में बहुत सी ऐसी चीजें …
Read More »रुद्राभिषेक क्यों है इतना प्रभावी और महत्वपूर्ण
भगवान शिव अनादि व अनन्त हैं अर्थात न तो कोई भगवान शिव के प्रारंभ के बारे में जानता है और न ही कोई अंत के बारे में। इसलिए इन्हें अजन्मा और अनश्वर भी कहते हैं। भगवान शिव का स्वरूप जितना रहस्यमय है, वे उतने ही सरल भी हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव सिर्फ एक लोटा जल चढ़ाने से …
Read More »मनु – शतरुपा को वरदान
सृष्टि के आदि में पितामह ब्रह्मा ने सर्व प्रथम स्वयंभू मनु और शतरुपा की सृष्टि की। आगे चलकर इन्हीं भाग्यवान दम्पति के द्वारा सृष्टि का विस्तार हुआ। उनके सदाचार, शील तथा पवित्र धर्माचरण के विषय में आज भी श्रुतियो में वर्णन मिलता है। हम सभी मानव उन्हीं मनु एवं शतरुपा की सन्तान हैं। इनके सबसे बड़े पुत्र का नाम …
Read More »Shirdi Sai Baba
शिरडी अनिवार्य रूप से एक छोटे से ऊंचा हो गया गांव, संत साईं बाबा की वजह से मशहूर है। साईं बाबा 1858 में शिरडी आये और, के रूप में भक्तों का कहना है, 60 वर्ष से यहां बिताने के बाद 1918 में समाधि (मोक्ष) प्राप्त किया। आज भी उनकी मौजूदगी यहाँ बहुत वास्तविक है। दरअसल, शिरडी साईं बाबा है, …
Read More »The Art of the Gong
This area can be played upward or downward to full effect. But the sun area must never be struck in the center. Instead hit the sun area just inside the boundary of its zone. Start to play from the edges of the sun. Playing point 6 will induce earthiness. Playing point 12 will create a sense of loftiness. Playing the …
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पौराणिक कथाओं, प्रेरक क्षण, मंदिरों, धर्मों, फिल्मों, हस्तियों के बारे में दिलचस्प जानकारी, हजारों गाने, भजन, आरती के बोल हैं Your wish may come true today…