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राहचबेनी: एक अनूठी क़हानी
यह कहानी दिखाती है कि जीवन के अंत में भी कैसे एक इंसान दूसरों के लाभ के लिए कुछ कर सकता है। सावित्रीदेवी की इच्छा और मदन का समर्पण इस कहानी को अद्वितीय बनाता है।
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यह कहानी दिखाती है कि जीवन के अंत में भी कैसे एक इंसान दूसरों के लाभ के लिए कुछ कर सकता है। सावित्रीदेवी की इच्छा और मदन का समर्पण इस कहानी को अद्वितीय बनाता है।
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पूनम पांडे (11 मार्च 1991 – 1 फरवरी 2024) भारतीय मॉडलिंग और फिल्म जगत की एक प्रसिद्ध हस्ती थीं, जिन्होंने विशेष रूप से अपनी बोल्ड भूमिकाओं के लिए प्रसिद्धि प्राप्त की। उनका फिल्मी सफर 2013 में फिल्म ‘नशा’ के साथ शुरू हुआ था। यूपी के बिजनेसमैन की बेटी कैसे बनी मुंबई की बोल्ड एक्ट्रेस, एक बयान से रातों-रात फेमस हो …
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बड़े बाजार में एक शानदार हवेली बनाने की तैयारियाँ हो रही थीं। खबर थी यहाँ एक सेठ जी संगमरमर का सतखण्डा महल बनवाएँगे। लाखों रुपये खर्च होंगे। पूरा होने पर उस जैसी शानदार हवेली शहर में दूसरी कोई नहीं होगी। पूरे शहर में इस बात की चर्चा होने लगी।
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भुट्टे में दाने अपनी जड़ों से जुड़े हुए होते हैं, शायद इसीलिए धरती मां का प्राकृतिक स्वाद अलग किए गए मक्के के दानों से दोबारा नहीं मिलता
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मां बाहर दरवाजे पर खड़ी हुई उसकी राह देख रही थी अंदर आकर हाथ मुंह धोकर दोनों ने भोजन किया तो मां ने उसे प्रसाद देते हुए कहा आज गली के मोड़ वाली सुमन भी वैष्णो देवी मंदिर दर्शन कर आई बस एक में ही हूं जो कोई तीर्थ .....
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इन 19 रियासतों में 16 रियासतें राजपूतों की, 2 जाटों की और एक मुस्लिम रियासत थी। गुहिल वंशी राजपूतों की 5 रियासतें मेवाड़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ व शाहपुरा थीं। राठौड़ राजपूतों की 3 रियासतें मारवाड़, बीकानेर व किशनगढ़ थीं। चौहान राजपूतों की 3 रियासतों में कोटा और बूंदी हाड़ा चौहानों की रियासतें थीं और सिरोही देवड़ा चौहानों की रियासत थी। …
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एक ऐसा समुदाय जिसके विषय में बहुत ही कम लोग जानते हैं तो आइए आज उनके विषय में जानते हैं I छत्तीसगढ में ये लोग राम नाम को शरीर पर गुदवाते हैं, राम नाम लिखे वस्त्र पहनते हैं। रामचरित्र मानस की पूजा करते हैं। उनका पूरा एक संप्रदाय है। लेकिन ये लोग न किसी मंदिर जाते हैं ना राम की …
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हिन्दी के कवियों ने बरसात के मौसम का वर्णन अपनी कविताओं में बेहद सुंदरता से किया है। यह ऋतु जीवन को नई ऊर्जा देती है और प्रकृति को हरा-भरा बना देती है।
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क्योंकि वह अब समझ चुका था उसका बड़ा भाई उसे मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, छोटी परेशानियों से उसे अकेले तो कठिन परिस्थितियों में उसकी ढाल..
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श्रीमती सुब्बुलक्ष्मी इनका बचपन का नाम मदुरै शनमुखावदिवु सुब्बुलक्ष्मी का जन्म 16 सितंबर 1916 को तमिलनाडु के मदुरै शहर, मद्रास प्रेसीडेंसी , ब्रिटिश भारत में हुआ। आप ने छोटी आयु से संगीत का शिक्षण आरंभ किया और दस साल की उम्र में ही अपना पहला डिस्क रिकॉर्ड किया
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