प्रभु भगत के प्रेम के वश में आ जाते है | भगत के लिए वो कभी अपने सभी नियम भी बदल देते है प्रबल प्रेम के पाले पड़ कर प्रभु को नियम बदलते देखा . अपना मान भले टल जाये भक्त मान नहीं टलते देखा .. जिसकी केवल कृपा दृष्टि से सकल विश्व को पलते देखा . उसको गोकुल में …
Read More »Bhajan/Aarti / Mantra/ Chalisa Lyrics
खुद तो बाहर ही खड़े रहे
खुद तो बाहर ही खड़े रहे, भीतर भेजा पांचाली को; यतिवर बाबा के चरणों में, जाकर अपना मस्तक रख दो । अर्धरात्रि की बेला में, भीषम की लगी समाधी थी; मन प्रभु चरणों में लगा हुआ, उस जगह न कोई व्याधा थी । कृष्णा ने जाकर सिर रक्खा, चरणों पर भीष्म पितामह के; चरणों पर कौन झुका, देखूँ, बाबा भीषम …
Read More »गोविन्द मेरी यह प्रार्थना है
श्री राम जय राम जय जय दयालु श्री राम जय राम जय जय कृपालु गोविन्द मेरी यह प्रार्थना है कि भूलूँ कभी न मैं नाम तेरा निश दिन मैं तो तेरे गीत गाऊं श्री राम जय राम जय जय दयालु श्री राम जय राम जय जय दयालु श्री राम जय राम जय जय कृपालु देहान्तकाले तुम सामने हो मुरली बजाते …
Read More »प्रबल प्रेम के पाले पड़ कर
प्रबल प्रेम के पाले पड़ कर प्रभु को नियम बदलते देखा . अपना मान भले टल जाये भक्त मान नहीं टलते देखा .. जिसकी केवल कृपा दृष्टि से सकल विश्व को पलते देखा . उसको गोकुल में माखन पर सौ सौ बार मचलते देखा .. जिसके चरणकमल कमला के करतल से न निकलते देखा . उसको ब्रज की कुंज गलिन में …
Read More »घूँघट का पट खोल रे
~ घूँघट के पट खोल ~ घूँघट के पट खोल रे, तोहे पिया मिलेंगे । घट घट मै तेरे साईं बसत है, कटुक बचन मत बोल रे । घूँघट के पट खोल रे, तोहे पिया मिलेंगे । धन जोबन का गरब ना कीजे, झूठा इन का मोल । घूँघट के पट खोल रे, तोहे पिया मिलेंगे । जाग यतन से …
Read More »बीत गये दिन
बीत गये दिन भजन बिना रे। भजन बिना रे भजन बिना रे॥ बाल अवस्था खेल गवांयो। जब यौवन तब मान घना रे॥ लाहे कारण मूल गवाँयो। अजहुं न गयी मन की तृष्णा रे॥ कहत कबीर सुनो भई साधो। पार उतर गये संत जना रे॥ wish4me
Read More »हे गोविन्द राखो शरन
हे गोविन्द हे गोपाल हे गोविन्द राखो शरन, अब तो जीवन हारे नीर पिवन हेत गयो सिन्धु के किनारे सिन्धु बीच बसत ग्राह चरण धरि पछारे चार प्रहर युद्ध भयो ले गयो मझधारे नाक कान डूबन लागे कृष्ण को पुकारे द्वारका मे सबद दयो शोर भयो द्वारे शन्ख चक्र गदा पद्म गरूड तजि सिधारे सूर कहे श्याम सुनो शरण हम …
Read More »जो घट अंतर हरि सुमिरे
जो घट अंतर हरि सुमिरै . ताको काल रूठि का करिहै जे चित चरन धरे .. हरि सुमिरे राम सिया राम जय जय राम सिया राम सहस बरस गज युद्ध करत भयै छिन एक ध्यान धरै . चक्र धरै वैकुण्ठ से धायै बाकी पैंज सरे .. हरि सुमिरे राम सिया राम जय जय राम सिया राम जहँ जहँ दुसह कष्ट भगतन …
Read More »हरि तुम हरो जन की भीर
मीरा, जिन्हें मीराबाई के नाम से भी जाना जाता है, 16 वीं सदी के हिंदू रहस्यवादी कवि और कृष्ण की भक्त थीं। उन्हें मूल रूप से ‘मिहिरा’ नाम दिया गया था, लेकिन अपनी कविता में उन्होंने अपना नाम परिवर्तित रूप में मीरा के कारण राजस्थानी लहजे में पेश किया और इसलिए मीरा के रूप में अधिक लोकप्रिय हो गईं। हरि …
Read More »नाम जपन क्यों छोड़ दिया
नाम जपन क्यों छोड़ दिया क्रोध न छोड़ा झूठ न छोड़ा सत्य बचन क्यों छोड दिया झूठे जग में दिल ललचा कर असल वतन क्यों छोड दिया कौड़ी को तो खूब सम्भाला लाल रतन क्यों छोड दिया जिन सुमिरन से अति सुख पावे तिन सुमिरन क्यों छोड़ दिया खालस इक भगवान भरोसे तन मन धन क्यों ना छोड़ दिया नाम …
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पौराणिक कथाओं, प्रेरक क्षण, मंदिरों, धर्मों, फिल्मों, हस्तियों के बारे में दिलचस्प जानकारी, हजारों गाने, भजन, आरती के बोल हैं Your wish may come true today…