घूँघट का पट खोल रे, तोहे पिया मिलेंगे। घट घट रमता राम रमैया, कटुक बचन मत बोल रे॥ रंगमहल में दीप बरत है, आसन से मत डोल रे॥ कहत कबीर सुनो भाई साधों, अनहद बाजत ढोल रे॥ wish4me in English ghoonghat ka pat khol re, tohe piya milenge. ghat ghat ramata raam ramaiya, katuk bachan mat bol re. rangamahal mein …
Read More »Gyan Ganga
बीत गये दिन
बीत गये दिन भजन बिना रे। भजन बिना रे भजन बिना रे॥ बाल अवस्था खेल गवांयो। जब यौवन तब मान घना रे॥ लाहे कारण मूल गवाँयो। अजहुं न गयी मन की तृष्णा रे॥ कहत कबीर सुनो भई साधो। पार उतर गये संत जना रे॥ wish4me in English beet gaye din bhajan bina re. bhajan bina re bhajan bina re. baal …
Read More »आप बिन कौन सुने प्रभु मोरी
आप बिन कौन सुने प्रभु मेरी तुम समरथ सब लायक दाता सब पर कृपा घनेरी दास की विपद निवारण कीजे अरज करूं मैं तेरी जब जब पीर पड़ी भगतन पर तब तब की न देरी कहत कबीरा देर कहाँ की नाथ शरण मैं तेरी wish4me in English aap bin kaun sune prabhu meree tum samarath sab laayak daata sab par …
Read More »मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में
मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में .. जो सुख पाऊँ राम भजन में सो सुख नाहिं अमीरी में मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में .. भला बुरा सब का सुन लीजै कर गुजरान गरीबी में मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में .. आखिर यह तन छार मिलेगा कहाँ फिरत मग़रूरी में मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में .. प्रेम नगर …
Read More »राम बिनु तन को
राम बिनु तन को ताप न जाई। जल में अगन रही अधिकाई॥ राम बिनु तन को ताप न जाई॥ तुम जलनिधि मैं जलकर मीना। जल में रहहि जलहि बिनु जीना॥ राम बिनु तन को ताप न जाई॥ तुम पिंजरा मैं सुवना तोरा। दरसन देहु भाग बड़ मोरा॥ राम बिनु तन को ताप न जाई॥ तुम सद्गुरु मैं प्रीतम चेला। कहै …
Read More »राम भजा सो जीता जग में
राम भजा सो जीता जग में राम भजा सो जीता रे हाथ सुमिरनी, बगल कतरनी, पढ़े भागवत गीता रे हृदय शुद्ध कीन्हों नहीं तेने, बातों में दिन बीता रे ज्ञान देव की पूजा कीन्ही, हरि सो किया न प्रीता रे धन यौवन यूँ ही जायेगा, अंत समय में रीता रे कहे कबीर काल यूँ मारे जैसे हिरन को चीता रे …
Read More »यदि नाथ का नाम दयानिधि है
यदि नाथ का नाम दयानिधि है, तो दया भी करेंगे कभी न कभी । दुखहारी हरी, दुखिया जन के, दुख क्लेश हरेगें कभी न कभी । जिस अंग की शोभा सुहावनी है, जिस श्यामल रंग में मोहनी है । उस रूप सुधा से स्नेहियों के, दृग प्याले भरेगें कभी न कभी । जहां गीध निषाद का आदर है, जहां व्याध …
Read More »यही हरि भक्त कहते हैं
यही हरि भक्त कहते हैं, यही सद्ग्रन्थ गाते हैं । कि जाने कौन से गुण पर, दयानिधि रीझ जाते हैं । नहीं स्वीकार करते हैं, निमंत्रण नृप दुर्योधन का । विदुर के घर पहुंचकर, भोग छिलकों का लगाते हैं । न आये मधुपुरी से गोपियों की, दुख कथा सुनकर । द्रुपदजी की दशा पर, द्वारका से दौड़े आते हैं । …
Read More »अब सौंप दिया इस जीवन का
अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में… उद्धार पतन अब मेरा है भगवान तुम्हारे हाथों में … हम तुमको कभी नहीं भजते, फिर भी तुम हमें नहीं तजते. अपकार हमारे हाथों में, उपकार तुम्हारे हाथों में.. अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में… हम में तुम में है भेद यही, हम नर …
Read More »भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना
भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना । अब तक तो निभाया है, आगे भी निभा देना ॥दल बल के साथ माया, घेरे जो मुझ को आ कर । तुम देखते ना रहना, झट आ के बचा लेना ॥ भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना । संभव है झंझटों में मैं तुझ को भूल जाऊं । पर नाथ कहीं …
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