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बृहस्पतिवार को बाल ना धोने का रहस्य

बृहस्पतिवार को बाल क्यों नहीं धोने चाहिए

हम अक्सर अपने घरो में देखते हैं या सुनते हैं कि जब भी कभी बृहस्पतिवार का दिन होता हैं और उस दिन अगर किसी कारणवश बालों को धोना पड़ जाये तो घर के बड़े जैसे दादी-नानी और मम्मी तुरंत मना कर देते हैं कि बृहस्पतिवार को बाल नहीं धोने चाहिये। आजकल की युवा पीढ़ी पुराने रीती-रिवाज,परम्पराओं को नहीं मानते हैं। …

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कहानी एक बूढ़ी लाचार उदास माँ की

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एक आलीशान से बँगले के बड़े से लिविंग रूम मेंवाल पेंटिंग के जैसे शानदार स्मार्ट टी वी दीवार पर टंगा हैऔर लाइव आ रहा है आई पी ऐल का फाइनलरोमांच है कि हर गेंद के साथ बस बढ़ता ही चला जा रहा हैलिपे पुते चेहरों पर तनाव है ख़िझ है और है ग़ुस्सा सा भीतो है कभी कभार राहत भी …

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सदा सत्य ही बोले

एक दिन एक भुड़सवार अपने गुस्सैल घोड़े को बेचने के लिए बाजार ले जा रहा था। चलते चलते उसे भूख लगी और वो खाना खाने के लिए एक बाग़ में रुक गया। उसने एक पेड़ से घोड़े को बांध दिया। घोडा पेड़ के नीचे लगी घास को खाने लगा और वो घुड़सवार भी खाना खाने लगा। तभी एक व्यक्ति अपने …

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पिता का प्रेम..

ट्रेन में समय गुजारने के लिए बगल में बैठे बुजुर्ग से बात करना शुरु किया मेरी पत्नी नीति नें ” आप कहाँ तक जाएंगे दादा जी “” इलाहाबाद तक । ” बुजुर्ग ने जवाब दिया.उसने (पत्नी) ने मजाक में कहा ” कुंभ लगने में तो अभी बहुत टाइम है बाबा। “” वहीं तट पर बेठकर इंतजार करेंगे कुंभ का ,बेटी …

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यही सूत्र है परमात्मा तक जाने का।

यही सूत्र है परमात्मा तक जाने का। मैंने सुना है, एक सम्राट अपने वजीर से नाराज हो गया। और उसने वजीर को एक बहुत ऊंचे मीनार पर कैद करवा दिया। उस मीनार से कूदने के सिवाय और कोई बचने का उपाय न था। लेकिन कूदना मरना था। मीनार बड़ी ऊंची थी। उससे कूदे तो मरे। कोई हथकड़ियां नहीं डाली थीं।वजीर …

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एवोल्यूशन थ्योरी?

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बच्चों को अब नहीं पढ़ाई जाएगी चार्ल्स डार्विन की एवोल्यूशन थ्योरी?शिक्षा के क्षेत्र में आए दिन नए-नए बदलावों को लेकर सुर्खियों में रहने वाला एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) एक बार फिर चर्चा में है। खबर है कि इस बार एनसीईआरटी ने कक्षा 9 और 10 के साइंस के सिलेबस से दुनिया के सबसे महान वैज्ञानिकों में से …

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जो प्राप्त है पर्याप्त है

उड़ीसा में बैंगन बेचनेवाले की एक बालिका थी | दुनिया की दृष्टि से उसमें कोई अच्छाई नहीं थी | न धन था, न रूप | किन्तु दुनिया की दृष्टिसे नगण्य उस बालिका को संत जयदेव गोस्वामी जी का पद गीत गोविंदम बहुत ही भाता था | वह दिन-रात उसको गुनगुनाती रहती थी और भगवान के प्रेम में डूबती-उतराती रहती थी …

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औरत को आईने में यूँ उलझा दिया गया,

औरत को आईने में यूँ उलझा दिया गया,बखान करके हुस्न का, बहला दिया गया.ना हक दिया ज़मीन का, न घर कहीं दिया,गृहस्वामिनी के नाम का, रुतबा दिया गया.छूती रही जब पाँव, परमेश्वर पति को कह,फिर कैसे इनको घर की, गृहलक्ष्मी बना दिया.चलती रहे चक्की और जलता रहे चूल्हा,बस इसलिए औरत को, अन्नपूर्णा बना दिया.न बराबर का हक मिले, न चूँ …

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व्यवहार

आज सालो बाद मार्केट में स्कूल की सहेली रिया मिली। बहुत सालों बाद अपनी स्कूल की सहेली को देखा। दोस्ती गहरी तो नहीं थी पर हां स्कूल में बात होती रहती थी।खुशी में दोनो ने भरे बाजार में एक दूसरे को गले लगाया, बहुत खुश हो गई दोनो सहेलिया आखिर सालो बाद जो मिली है।रिया ने घर आने का आमंत्रण …

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छोटी छोटी बातों में खुशियों की तलाश

छोटी छोटी बातों में खुशियों की तलाश करना इतना भी मुश्किल नहीचल यार एक हफ्तें की छुट्टी ले कर बाहर घूमने चलते है. मैं तो परेशान हो गया हूँ घर गृहस्थी से.इससे अच्छा तो शादी ही नही करता.” रजत ऑफिस के लंच टाइम पर सुनील से बोला.“क्यों ऐसा क्या हो गया ?”“क्या बताऊं. किसी न किसी बात पर निधि से …

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